Article
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: भारतीय किसानों और कृषि पर इसका प्रभाव
10 Feb 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित नया व्यापार समझौता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है, लेकिन इसके संभावित प्रभावों को लेकर भारत के करोड़ों किसानों में चिंता भी बढ़ रही है। खासतौर पर कृषि क्षेत्र पर इसके असर को लेकर विशेषज्ञों और किसान संगठनों की नजरें टिकी हुई हैं।
व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका लंबे समय से एक व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाजार को उसके कृषि उत्पादों के लिए और अधिक खोला जाए, जबकि भारत अपने किसानों और घरेलू कृषि व्यवस्था की सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता में डेयरी, अनाज, दालें और तिलहन जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।
भारतीय किसानों की चिंताएं
भारतीय किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ने की आशंका किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। किसान संगठनों का मानना है कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता के तहत आयात शुल्क कम किए गए, तो घरेलू किसानों को अपनी फसलों के उचित दाम नहीं मिल पाएंगे।
सरकार का पक्ष क्या है?
भारत सरकार का कहना है कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि समझौते में ऐसे सुरक्षा प्रावधान शामिल हों, जिससे भारतीय कृषि बाजार को अचानक झटके न लगें। साथ ही, निर्यात के नए अवसर खोलने और भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की भी बात कही जा रही है।
अमेरिका की रणनीति
अमेरिका इस समझौते को अपने कृषि निर्यात को बढ़ाने का अवसर मान रहा है। अमेरिकी किसान और कृषि कंपनियां भारत जैसे बड़े बाजार में प्रवेश को बेहद अहम मानती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता के जरिए अमेरिका भारत से अपने कृषि आयात नियमों को और उदार बनाने की उम्मीद कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापार समझौता दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ इससे निवेश और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ यदि संतुलन नहीं रखा गया तो भारतीय किसानों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि छोटे और सीमांत किसानों को विशेष संरक्षण की जरूरत होगी।
आगे की राह फिलहाल,
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और अंतिम फैसला अभी होना बाकी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सरकार किसानों के हितों और वैश्विक व्यापार दबावों के बीच किस तरह संतुलन बनाती है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगा, बल्कि भारत के कृषि क्षेत्र के भविष्य पर भी गहरा असर डाल सकता है।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें भारतीय किसानों के हितों की कितनी मजबूती से रक्षा की जाती है। करोड़ों किसानों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए कोई भी निर्णय लेना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
Read This Also:- अमेरिका और बांग्लादेश के बीच 19% टैरिफ के साथ व्यापार समझौता संपन्न हुआ।