Article
सनाए ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
09 Feb 2026
‘जापान की पहली महिला पीएम’ बनकर साने तकैची ने तोड़ा परंपरागत राजनीतिक ढांचा
जापान ने अपनी 140-साल से अधिक राजनीतिक इतिहास में एक ऐसा क्षण देखा है जिसकी कल्पना कई दशक पहले शायद ही कोई कर सकता था — साने तकैची जापान की पहली महिला पीएम बन गई हैं, जिन्होंने 21 अक्टूबर 2025 को संसद द्वारा अधिकतम समर्थन प्राप्त कर जापान की प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
64 वर्षीय साने तकैची ने संसद के निचले सदन में 237 और ऊपरी सदन में 125 कानून निर्माताओं का समर्थन प्राप्त कर यह ऐतिहासिक पद संभाला, जिससे वे जापान की पहली महिला पीएम के रूप में देश की राजनीति में स्थायी छाप छोड़ने में सफल रहीं।
ये उपलब्धि न केवल लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की राजनीतिक विजय को दर्शाती है, बल्कि जापान में महिलाओं के बढ़ते राजनीतिक नेतृत्व की दिशा में एक निर्णायक संकेत भी है। हालांकि देश की राजनीति पुरुष-प्रधान रही है, तथापि तकैची का यह कदम जापानी समाज के लिए एक नया आरंभ भी है।
साने तकैची का राजनीतिक सफर और सरकारी एजेंडा — सुधार और संसद में बहुमत
साने तकैची का राजनीतिक सफर 1993 में शुरू हुआ जब उन्होंने पहली बार निचले सदन में सांसद के रूप में सीट जीती। इसके बाद वे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में रहीं, जिनमें आंतरिक मामलों और संचार मंत्री तथा आर्थिक सुरक्षा मंत्री के रूप में कार्य शामिल है।
वे 4 अक्टूबर 2025 को LDP की अध्यक्ष बनीं — इस पद पर फ़िर भी किसी महिला का होना बेहद दुर्लभ था — और 17 दिन बाद ही उन्होंने जापान की पहली महिला पीएम के रूप में नेतृत्व संभाला। यह उपलब्धि उनके राजनीतिक अनुभव, कड़ा रूढ़िवादी एजेंडा और पार्टी में गहरे नेटवर्क की वजह से संभव हो सकी।
उनके नेतृत्व में LDP ने हाल ही में हुए फरवरी 2026 के समय से पहले चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया, जिसमें उनकी पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगी ने संसद के निचले सदन में दो-तिहाई से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग विजय के साथ वे न केवल सरकार में स्थिरता लाने में सफल रहीं, बल्कि यह भी दिखाया कि उनका नीतिगत एजेंडा जनता के बीच व्यापक प्रभाव रखता है।
आर्थिक एवं सुरक्षा नीतियाँ
तकैची की नीतियाँ काफी हद तक रूढ़िवादी और राष्ट्रवादी रही हैं। उनका एजेंडा जापान की आर्थिक प्रणाली को मज़बूत करना, कर में राहत देना, घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना, और रक्षा बजट तथा सुरक्षा गठबंधनों को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस खेमे की नीतियों ने व्यापार और शेयर बाजार में तेजी का मार्ग बनाया, जिससे टोक्यो के प्रमुख शेयर सूचकांक ने इतिहास-संबंधी उच्च स्तर देखे।
इसके अलावा, उनका विदेश नीति का रुख भी अधिक सक्रिय व मजबूत रहा है — विशेषकर चीन और ताइवान के मुद्दों पर — और इससे क्षेत्र में जापान की वैश्विक भूमिका और सुरक्षा भागीदारी को नई दिशा मिली है।
विपक्ष और आलोचना
हालांकि साने तकैची की लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ व्यापक रही, लेकिन उनके नेतृत्व को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। आलोचकों का कहना है कि उनकी महिला-सशक्तिकरण नीतियां अपेक्षाकृत कमजोर हैं और महिलाओं को उच्च सरकारी पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसके अलावा, उनके रूढ़िवादी विचारों पर आधारित कुछ सामाजिक मुद्दों — जैसे समान-लिंग विवाह और पारंपरिक सामाजिक संरचना — को लेकर युवा एवं प्रगतिशील वर्ग के अंदर मतभेद भी देखे गए हैं।
जापान की राजनीति पर प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
साने तकैची के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद वैश्विक राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। भारतीय प्रधानमंत्री सहित कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने उन्हें बधाई दी और जापान-भारत रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की है। उनके नेतृत्व के कारण जापान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति में एक क्रमिक बदलाव प्रतीत होता है — विशेषकर अमेरिका के साथ घनिष्ठ रक्षा साझेदारी तथा क्षेत्रीय समन्वय आगे बढ़ाने की दिशा में।
सामाजिक महत्व और महिलाओं के लिए प्रेरणा
उनकी नियुक्ति इस अर्थ में भी महत्वपूर्ण है कि इससे जापानों समाज में महिलाओं को उच्च नेतृत्व भूमिकाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्राप्त हुआ है। यदि देश की वर्तमान महिला प्रतिनिधित्व दर को देखें तो यह अभी भी पुरुष-प्रधान है, लेकिन साने तकैची के प्रधानमंत्री बनने से राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महिलाओं के लिए संभावनाएँ बढ़ी हैं।
विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के बीच यह एक सकारात्मक संदेश बन गया है कि पुरानी बाधाओं को पार कर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है। इस उपलब्धि से जापान में लैंगिक समानता पर चर्चा और भी गहन रूप से होने की संभावना है।