Article

ट्रंप ने पुतिन के परमाणु सीमा प्रस्ताव को खारिज किया, वैश्विक तनाव बढ़ा

 06 Feb 2026

अमेरिका–रूस परमाणु तनाव फिर चर्चा में


अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगे कैप (सीमा) को आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। इस फैसले ने वैश्विक राजनीति और सामरिक संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसे ट्रंप पुतिन परमाणु समझौता से जुड़ा एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

वैश्विक सुरक्षा संकट के बीच पुतिन का प्रस्ताव


रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया था जब दुनिया पहले से ही यूक्रेन युद्ध, नाटो के विस्तार और बढ़ते सैन्य तनावों का सामना कर रही है। पुतिन का तर्क था कि परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी तैनाती पर नियंत्रण बनाए रखना वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इस अपील को ठुकराते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी ऐसे समझौते को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिसे वह अपने रणनीतिक हितों के खिलाफ मानता है। इस संदर्भ में ट्रंप पुतिन परमाणु समझौता पर सहमति न बन पाना दोनों देशों के बीच गहरे मतभेदों को उजागर करता है।

ट्रंप का सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा रुख


ट्रंप के इस रुख को अमेरिका की कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण समझौतों पर सवाल उठाए थे और यह तर्क दिया था कि ऐसे समझौते अमेरिका की क्षमताओं को सीमित करते हैं, जबकि अन्य देश उनका पूरी तरह पालन नहीं करते। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को अपनी रक्षा क्षमताओं पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार नहीं करनी चाहिए। यही वजह है कि ट्रंप पुतिन परमाणु समझौता को लेकर उनका रुख लगातार सख्त बना रहा है।

हथियार नियंत्रण समझौतों का भविष्य


परमाणु हथियारों की तैनाती पर सीमा लगाने वाले समझौते दशकों से अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने का एक अहम जरिया रहे हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि दोनों देश हथियारों की अंधाधुंध प्रतिस्पर्धा में न उलझें। लेकिन ट्रंप द्वारा इस अपील को ठुकराए जाने से संकेत मिलता है कि भविष्य में ट्रंप पुतिन परमाणु समझौता जैसे समझौतों को लेकर वैश्विक सहमति कमजोर पड़ सकती है।

वैश्विक असर और हथियारों की दौड़ का खतरा


विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि बड़े देश परमाणु हथियारों पर नियंत्रण से पीछे हटते हैं, तो अन्य देश भी अपने सैन्य कार्यक्रमों को तेज कर सकते हैं। इससे वैश्विक हथियारों की दौड़ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

राजनीतिक पहलू और अमेरिका–रूस संबंध


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह कदम घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है। सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा नीति अक्सर अमेरिकी राजनीति में समर्थन जुटाने का एक प्रभावी माध्यम रही है। वहीं, रूस इस फैसले को अमेरिका की एकतरफा नीति के रूप में देख सकता है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव आ सकता है।

वैश्विक परमाणु स्थिरता का भविष्य


कुल मिलाकर, परमाणु हथियारों की तैनाती पर सीमा बढ़ाने से इनकार करना वैश्विक राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। यह न केवल अमेरिका–रूस संबंधों की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और हथियार नियंत्रण से जुड़ी बहस को भी नई दिशा देगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या भविष्य में कोई नया समझौता संभव हो पाएगा या वैश्विक तनाव और गहराता जाएगा।

Read This Also:- DNA से खुलासा, कलयुगी पिता ने मुंबई में महिला के साथ बलात्कार किया