2026 के शुरु में मणिपुर की राजनीति में एक नया और प्रेरणादायक अध्याय लिखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व एथलीट और वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद को मणिपुर का अगला मुख्यमंत्री (Chief Minister) नियुक्त करने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने की उम्मीदें जगी हैं। यह नाम सिर्फ एक राजनीतिक चयन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे शख्स की कहानी है जिसने खेल में राष्ट्रीय पहचान बनाई और अब मणिपुर के सर्वोच्च प्रशासनिक पद तक पहुंच रहा है।
युमनाम खेमचंद: ताइक्वांडो प्लेयर से मुख्यमंत्री कैंडिडेट तक
युमनाम खेमचंद का नाम आज सुबह से राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया दोनों में प्रमुखता से छाया हुआ है। खेमचंद एक जाने-माने ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने न केवल भारत में मार्शल आर्ट के जगत में बल्कि राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उनकी ताइक्वांडो यात्रा ने उन्हें अनुशासन, संयम और नेतृत्व जैसी खूबियाँ दीं, जो अब राज्य के प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
खेमचंद की खेल में उपलब्धियों में प्रमुख है पांचवीं-डैन ब्लैक बेल्ट — वह पहली भारतीय हैं जिन्हें यह उच्चतम स्तर का ब्लैक बेल्ट दक्षिण कोरिया की Global Traditional Taekwondo Federation से मिला है। उन्होंने 16 वर्ष की उम्र से प्रशिक्षण शुरू किया और 1980 के दशक में असम तथा मणिपुर में ताइक्वांडो को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजनीति में उनका सफ़र भी उतना ही प्रभावशाली रहा है। उन्होंने सिंगजामई विधानसभा क्षेत्र से 2017 और 2022 में विधायक के रूप में जीत हासिल की और बाद में मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) के रूप में भी सेवा दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मणिपुर सरकार में विभिन्न विभागों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
राजनीतिक नेतृत्व और मणिपुर में बदलाव की जरूरत
मणिपुर पिछले लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) के अधीन रहा है। 2025 के शुरू में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। अब विधानसभा की सक्रियता वापस लाने और लोकतांत्रिक शासन को बहाल करने की प्रक्रिया में भाजपा ने विधायक दल की बैठक कर युमनाम खेमचंद को नेता चुना है, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो गया है।
राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियाँ काफी गहरी रही हैं, विशेषकर मेइती, कूकी-ज़ो और नगा समुदायों के बीच लंबे समय से संघर्ष और विवाद के कारण। भाजपा नेतृत्व, केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि युमनाम खेमचंद जैसा नेता, जिसने खेल के साथ-साथ शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए भी काम किया है, वह इन चुनौतियों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
वर्ष 2025 के अंत में खेमचंद ने कूकी समुदाय के आंतरिक रूप से विस्थापित (IDPs) लोगों से भी मिलकर संवाद स्थापित किया था, यह पहल राज्य में सामुदायिक विश्वास वापस लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई थी।
भविष्य की चुनौतियाँ और उम्मीदें
अब जब युमनाम खेमचंद मुख्यमंत्री पद की ओर अग्रसर हैं, तो उनके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। मणिपुर लंबे समय से जातीय तनाव, हिंसा, बेरोज़गारी और विकास की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। भाजपा नेतृत्व और स्थानीय जनता दोनों को उम्मीद है कि खेमचंद की प्रशासनिक नीतियाँ इन मुद्दों का समाधान ढूँढेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी खेल-प्रेरित पृष्ठभूमि और शांतिपूर्ण सामुदायिक पहुंच उन्हें लोगों से जोड़कर सामाजिक समरसता बनाए रखने में मदद कर सकती है। साथ ही, मणिपुर में विकास कार्यों को गति देने के लिए नई योजनाओं और निवेश को आकर्षित करने की आवश्यकता भी है, जिससे युवा वर्ग को रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भाजपा की यह रणनीति राज्य में स्थिर शासन और व्यापक संवाद के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है — खासकर तब जब राजनीति और सामाजिक संघर्ष दोनों क्षेत्रों में संतुलन की जरूरत ज़्यादा है।