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Economic Survey 2026: 2026-27 में GDP वृद्धि दर 6.8%-7.2% के बीच अनुमानित।
30 Jan 2026
Economic Survey 2026 के प्रमुख निष्कर्ष और GDP प्रक्षेपण
भारत सरकार ने संसद में Economic Survey 2026 पेश कर अपनी वार्षिक आर्थिक रिपोर्ट पेश की, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि दर को 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि घरेलू मांग, मजबूत खपत और पूंजीगत निवेश भारत की आर्थिक गति को आगे बढ़ाने वाले मुख्य कारक रहेंगे, जबकि वैश्विक अनिश्चितता और निर्यात-सम्बंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहना आवश्यक है।
2025-26 के लिए अनुमानित GDP वृद्धि दर लगभग 7.4% रही, जो 2026-27 में थोड़ा मध्यम होकर भी मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। इस बार सर्वे ने भारत के मध्यम-अवधि विकास की क्षमता को भी लगभग 7% तक बढ़ाया है, जो पिछले कुछ वर्षों की नीति सुधारों का असर बताती है।
Economic Survey 2026 ने बताया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक जोखिमों और कमजोर निर्यात गतिविधियों के बीच भी भारत का आर्थिक आधार स्थिर है और घरेलू कार्यालयों, व्यापार और वस्तु एवं सेवा क्षेत्र के सुधारों ने अर्थव्यवस्था को लचीला बनाया है। देश की भारी घरेलू खपत और मजबूत निवेश संकेतों ने भी अगले वित्त वर्ष की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और बजट का प्रभाव
वर्तमान में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और इसकी वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत देती है। Economic Survey 2026 में यह भी कहा गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे घरेलू मांग, उपभोग (Consumption) और निजी तथा सार्वजनिक निवेश का समन्वय मुख्य रूप से उत्तरदायी है। घरेलू बाजार की मजबूती, उपभोक्ता खर्चों में वृद्धि और कृषि तथा सेवा क्षेत्रों का निरंतर योगदान भारत की वृद्धि में सहयोगी साबित हो रहे हैं।
भारत का निर्यात-उन्मुख क्षेत्र वैश्विक उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है, लेकिन इस कारण देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की क्षमता बनी हुई है। घरेलू उत्पादन और विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि ने निर्यात-सम्बंधी चुनौतियों को संतुलित करने में मदद की है। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 भी Growth-Friendly नीतियों, जैसे कि तेज पूंजीगत निवेश, कर प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे क्षेत्रों पर जोर देगा, जिससे भविष्य के विकास को और प्रोत्साहन मिलेगा।
आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी महंगाई को नियंत्रण में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के कदम उठाए हैं, जिससे निवेश और उपभोग का माहौल सुधरता है। सर्वे में यह संकेत भी मिला है कि मुद्रास्फीति (Inflation) नियंत्रण में रहने से घरेलू बचत और निवेश बढ़े हैं, जो आर्थिक वृद्धि की गति को आगे बढ़ाते हैं।
वैश्विक चुनौतियाँ, अवसर और भारत की स्थिरता
जब भारत 2026-27 के लिए 6.8%-7.2% वृद्धि दर का अनुमान लगाता है, तो यह एक ऐसे वैश्विक परिदृश्य में हो रहा है जिसमें कई अर्थव्यवस्थाएँ अस्थिरता, उच्च ऊर्जा लागतों और मुद्रा दबाव जैसे जोखिमों का सामना कर रही हैं। Economic Survey 2026 ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विकास क्षमता मजबूत है, लेकिन निरंतर संरचनात्मक सुधार और वैश्विक सहयोग आवश्यक हैं, ताकि निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
वैश्विक आर्थिक मंचों पर भारत की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है, खासकर जब विश्व बैंक और IMF जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी भारत को मजबूत आर्थिक संभावित वृद्धि वाला देश मानते हैं। हालांकि अन्य देशों के मुकाबले भारत को वैश्विक मंदी, पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी घरेलू नीतियाँ और सतर्क आर्थिक प्रबंधन भारत को इस दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बनाए रखने जैसे कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं। यह कदम विदेशी निवेशकों के भरोसे को बढ़ाते हैं, भले ही वे कुछ समय के लिए पूंजी प्रवाह में थोड़ा संशय दिखा रहे हों। ऐसे कदम अर्थव्यवस्था को राहत देते हैं और निवेशकों को दीर्घकालिक अवसरों के लिए आश्वस्त करते हैं।
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