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अजीत पवार का निधन, पूरा देश शोक में डूबा।
28 Jan 2026
अजीत पवार का निधन: दुखद विमान हादसा और घटनाक्रम
आज सुबह महाराष्ट्र के बारामती में एक दुखद विमान हादसे में वरिष्ठ नेता अजीत पवार का निधन: हो गया, जब उनका चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर क्रैश हो गया। इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के अलावा विमान में सवार अन्य चार लोगों की भी मौत हुई है, जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
अजीत पवार का निधन: यह हादसा ऐसे समय हुआ जब वह स्थानीय चुनाव प्रचार के लिए बारामती जा रहे थे। दुर्घटना के बाद राहत-बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर पहुँचा, लेकिन विमान में सवार सभी पांच लोगों को बचाया नहीं जा सका। इस हादसे की खबर के बाद महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है, और पूरे राज्य की राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियाँ शोक की भावना में डूबी हुई हैं।
नेताओं के संदेश: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने जताया शोक
अजीत पवार का निधन: पर राष्ट्र के उच्चतम नेतृत्व ने गहरा दुःख जताया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे “अपूर्व और अपूरणीय क्षति” बताया है और कहा कि पवार महाराष्ट्र के विकास, खासतौर पर सहकारी क्षेत्र में योगदान देने वाले लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार व समर्थकों के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अजीत पवार का निधन: पर गहरा दुःख जताते हुए कहा कि पवार एक जनता के नेता थे, जिनका जमीन-से-जुड़ाव और प्रशासनिक मामलों में अनुभव अतुलनीय था। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उनके परिवार और समर्थकों को शक्ति मिलने की प्रार्थना की।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस दुःखद घटना पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि पवार का योगदान न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे राजनीतिक परिवार के लिए यादगार रहेगा।
इसके अलावा, कई अन्य नेताओं ने भी सामाजिक मंचों पर श्रद्धांजलि अर्पित की है—कांग्रेस, अन्य विपक्षी दलों के नेता तथा महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े कई वरिष्ठ हस्तियों ने पवार के निधन पर दुःख व्यक्त किया।
अजीत पवार की राजनीतिक विरासत और जनता में शोक
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का निधन: न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी गहरा दुःख फैल गया है। पवार को उनके सहयोगियों और समर्थकों द्वारा एक अनुभवी, कर्मठ और जनता-प्रिय नेता के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की।
पवार ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सहकारी समितियों से की थी और बाद में छह बार उपमुख्यमंत्री पद संभाला। उनके नेतृत्व में कई चावल, चीनी मिल और ग्रामीण विकास से जुड़े अभियानों को गति मिली थी, जिससे वे महाराष्ट्र के ग्रामीण और कृषि-आधारित समुदायों में बेहद लोकप्रिय थे।
उनकी अचानक और असामयिक मौत से राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है, और राज्य की राजनीति में अब नेतृत्व-विहीनता की चर्चा जोर पकड़ रही है। समर्थक और विरोधी दोनों ही समूह उनके योगदान को याद कर रहे हैं और इस दुःखद क्षण में सहानुभूति व्यक्त कर रहे हैं।
देश पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँ
अजीत पवार का निधन: ने केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी हिला दिया है। एक अनुभवी नेता के खोने से राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ेगा—विशेषकर राज्य में सत्ता-सामंजस्य और आगामी चुनावी रणनीतियों पर। कई विश्लेषक मानते हैं कि पवार के जाने से राज्य में राजनीतिक समीकरण और गठजोड़ों में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।
राज्य सरकार ने शोक दिवस घोषित कर दिया है, और पूरे महाराष्ट्र में शोक की भावना व्याप्त है। सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
भविष्य में, यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे राज्य प्रशासन और जनता इस विशाल राजनीतिक और सामाजिक रिक्ति को भरने की दिशा में काम करते हैं।
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