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संसद बजट सत्र 2026: भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था पर राष्ट्रपति मुर्मू।
28 Jan 2026
संसद बजट सत्र 2026 की शुरुआत: प्रक्रिया, उद्देश्य और प्रमुख विषय
संसद का बजट सत्र 2026 28 जनवरी 2026 से शुरू हो गया है, जिसकी परंपरागत शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सत्र को संबोधित करने वाले अभिभाषण के साथ हुई। इस सत्र के दौरान वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। यह सत्र देश की अर्थव्यवस्था, विकास नीतियों, सामाजिक योजनाओं और विधायी प्रस्तावों पर विस्तृत बहस का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण का मुख्य उद्देश्य सदनों को आगामी बजट प्रस्तावों की दिशा से अवगत कराना और सरकार की प्राथमिकताओं का खाका पेश करना होता है। इस वर्ष संसद बजट सत्र 2026 की पृष्ठभूमि में कई संवेदनशील विषय हैं—उन्हीं में से एक है भ्रष्टाचार-मुक्त शासन व्यवस्था का निर्माण। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार सफलतापूर्वक ऐसे तंत्रों को लागू करने में लगी हुई है जो भ्रष्टाचार को नियंत्रित और समाप्त करने की दिशा में प्रभावी साबित हो रहे हैं।
यह सत्र राजनीतिक गतिविधियों और सरकार-विपक्ष दोनों की रणनीतियों का भी महत्वपूर्ण मंच है। विपक्षी दलों ने पहले ही कई मुद्दों को संसद की बैठकों में उठाने की तैयारी कर ली है, जिसमें आर्थिक असंतुलन, रोजगार सृजन, विदेशी नीतियाँ और सामाजिक न्याय शामिल हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था और सरकार की प्रतिबद्धता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में बजट सत्र 2026 की शुरुआत पर कहा कि सरकार भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था बनाने में निरंतर सफल हो रही है। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक समावेशन जैसे सिद्धान्तों को नीति निर्माण की दिशा में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उनका मानना है कि भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था को सुनिश्चित करने का लक्ष्य केवल एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि एक व्यवहार्य दिशा है जिसके लिए नवीन तंत्र, डिजिटल निगरानी और जवाबदेही के मजबूत तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इससे न केवल सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि नागरिकों की नजर में प्रशासनिक कार्यों की विश्वसनीयता भी सुधरती है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी संकेत दिया कि भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था से आर्थिक नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन और सार्वजनिक कल्याण योजनाओं का वास्तविक लाभ उठाना आसान हो गया है। यह सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप है कि प्रत्येक नीति का प्रभाव देश के अंतिम नागरिक तक पहुँचे और किसी भी स्तर पर भ्रष्ट प्रथाओं का दमन हो।
इस अभिभाषण ने सरकार की प्रतिबद्धता को दोबारा रेखांकित किया कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, नीति-निर्माण की ज्ञात प्रक्रियाओं और निष्पक्ष प्रशासन के सिद्धान्तों का पालन करते हुए देश को विकास के पथ पर आगे ले जा रही है।
संसद बजट सत्र 2026 में बहस के मुख्य मुद्दे: सरकार बनाम विपक्ष
बजट सत्र 2026 के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर तीव्र बहस करेंगे। विपक्षी दलों ने पहले ही कई संवेदनशील विषयों को उठाने की योजना बनाई है—मनरेगा, Special Investment Region (SIR) कानून, यूजीसी नियमों और विदेशी नीति मामलों जैसी चर्चाएँ मुख्य रूप से केंद्र में हैं।
सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जिनका हवाला राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में दिया। वहीं, विपक्ष इस दृष्टिकोण को चुनौती देते हुए विभिन्न विषयों पर बहस करने की रणनीति तैयार कर रहा है। इससे बजट सत्र 2026 एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीति-निर्माण मंच बन गया है जहाँ बहसें न केवल आर्थिक विषयों तक सीमित होंगी, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों तक फैलेंगी।
इसके अलावा, विपक्ष ने सरकार की विदेशी नीतियों, रुपये की गिरती कीमत, अमेरिका-भारत व्यापार मुद्दों और रोजगार-संबंधित नीतियों पर भी सवाल उठाने का संकेत दिया है।
परिषद में हो रही बहसें संकेत देती हैं कि बजट सत्र 2026 केवल एक वित्तीय समीक्षा नहीं है, बल्कि नीति-निर्माण, सामाजिक विवेक और लोकतांत्रिक आदर्शों की जांच का व्यापक रूप है। विपक्ष की सक्रिय भागीदारी सत्र को अधिक विवादित तथा गतिशील बना रही है।
भविष्य की दिशा: भ्रष्टाचार-मुक्त भारत की ओर
संसद बजट सत्र 2026 का यह प्रारंभिक चरण न केवल आर्थिक प्रस्तावों को समर्थन देगा, बल्कि व्यापक रूप से भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था के निर्माण पर भी देश के राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार देगा। राष्ट्रपति मुर्मू के संदेश ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है—जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त उपाय, सुशासन और नीति-सुधार शामिल हैं।
भविष्य में, यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद के इस सत्र में भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों पर कितनी व्यापक सहमति बनती है और संसदीय बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है। बजट सत्र 2026 देश के राजनीतिक विमर्श, आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक सुधारों को एक साथ जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है।
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