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भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 में व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया |

 27 Jan 2026

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आयोजित भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने का काम किया है। इस सम्मेलन का सबसे अहम पहलू भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को लेकर हुई गहन बातचीत रही, जिसे दोनों पक्षों ने “सार्थक और निर्णायक” बताया है। लंबे समय से लंबित इस समझौते को लेकर हुई ताजा प्रगति ने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान आकर्षित किया है।

भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व शीर्ष नेतृत्व ने किया, जबकि यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपीय आयोग और सदस्य देशों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान व्यापार, निवेश, तकनीक, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल सहयोग और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।

मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी


भारत-EU FTA को लेकर चल रही वार्ताएं पिछले कई वर्षों से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थीं। हालांकि, भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान दोनों पक्षों ने कई जटिल मुद्दों पर सहमति बनाने का दावा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार पहुंच, टैरिफ में कटौती, सेवा क्षेत्र, बौद्धिक संपदा अधिकार और सप्लाई चेन सहयोग जैसे विषयों पर सकारात्मक प्रगति हुई है।

भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि देश के किसानों, MSME सेक्टर और घरेलू उद्योगों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, यूरोपीय संघ ने भारत को एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार बताते हुए दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत-EU व्यापार संबंधों को मिलेगा बढ़ावा


वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। दोनों के बीच सालाना व्यापार सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 के बाद FTA लागू होने से भारत और EU के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

रणनीतिक और वैश्विक महत्व


भारत-ईयू शिखर सम्मेलन 2026 केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों ने वैश्विक अस्थिरता, यूक्रेन संकट, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी साझा रुख अपनाने की बात कही। नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई गई।

जलवायु लक्ष्यों को लेकर ग्रीन टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन न्यूट्रैलिटी के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

निष्कर्ष


India EU Summit 2026 को भारत-EU संबंधों के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते पर हुई प्रगति न केवल आर्थिक सहयोग को मजबूती देगी, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ को वैश्विक मंच पर रणनीतिक साझेदार के रूप में और करीब लाएगी। आने वाले समय में इसका असर व्यापार, निवेश और वैश्विक भू-राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

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