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अहमदाबाद-नोएडा स्कूलों को बम धमकी: गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा अलर्ट।

 23 Jan 2026

देशभर में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के उत्सव से केवल कुछ दिन पहले, अहमदाबाद-नोएडा स्कूलों को बम धमकी मिलने की खबर सामने आ रही है। अहमदाबाद और नोएडा के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों को शुक्रवार को ई-मेल के माध्यम से बम धमकी संदेश प्राप्त हुए, जिसके बाद स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दल और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे स्कूल परिसरों की तह तक जांच शुरू कर दी है। 


इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा विभाग को हाई-अलर्ट कर दिया है, बल्कि अभिभावकों और छात्रों के बीच तनाव भी पैदा कर दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि धमकी ई-मेल के प्राप्त होते ही तुरंत जांच शुरू की गई और किसी भी संदिग्ध वस्तु की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी तनाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है क्योंकि यह धमकी गणतंत्र दिवस से कुछ ही दिन पहले आई है।

धमकी के सन्देश और तत्काल प्रतिक्रिया


“अहमदाबाद-नोएडा स्कूलों को बम धमकी” मिलने के बाद जैसे ही प्रशासन को इसकी जानकारी मिली, तुरंत सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू कर दी। नोएडा में शिव नादार स्कूल, कैम्ब्रिज स्कूल और कुछ अन्य प्रतिष्ठित विद्यालयों को ई-मेल के जरिये यह धमकी मिली, जिसके परिणामस्वरूप स्कूल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इन्हें तत्काल बंद करने, छात्रों को घर भेजने और परिसर खाली करने का निर्देश दिया।

अहमदाबाद में भी कई प्रमुख स्कूलों को धमकी भरे संदेश मिले और पुलिस तथा बम निरोधक दल ने वहां भी जांच अभियान चलाया। दोनों शहरों में प्राप्त हुए धमकी संदेशों के बाद स्थानीय पुलिस, क्राइम ब्रांच, बम स्क्वाड और डॉग स्क्वाड टीमों ने स्कूल परिसरों की तलाशी शुरू कर दी और सभी वर्गों, कार्यशालाओं तथा बाहरी क्षेत्रों में विस्तृत जांच की गई। हालांकि, अब तक कहीं कोई संदिग्ध या खतरनाक वस्तु नहीं मिली है, लेकिन जांच जारी है।

नोएडा में शिव नादर स्कूल के प्रिंसिपल ने अभिभावकों को ईमेल के जरिये स्थिति की जानकारी दी और कहा कि छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है, इसलिए स्कूल को आज बंद रखा गया है और जांच दल पूरी सतर्कता के साथ परिसर की जांच कर रहा है। अहमदाबाद में भी संबंधित स्कूलों के प्रबंधन तथा पुलिस ने चेतावनी के बाद उचित कदम उठाए और छात्रों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

सुरक्षा जांच, संभावित कारण और अभिभावकों की प्रतिक्रिया


धमकी ई-मेल मिलने के पश्चात पुलिस और साइबर सेल टीमों ने धमकी के स्रोत को ट्रेस करने का काम शुरू कर दिया है। मेल के टेक्स्ट की जांच की जा रही है कि क्या यह कोई फर्जी संदेश, शरारती तत्व का प्रयास, या किसी अन्य उद्देश्य से भेजा गया था। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे धमकी संदेश अक्सर होax (झूठे) होते हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर के समय इन्हें हल्के में लेना मुश्किल होता है।

अभिभावकों और स्कूल कर्मचारियों में भी इस पूरे घटनाक्रम के कारण चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों ने कहा है कि अचानक से ऐसे संदेश मिलने से चिंता, तनाव और भय का माहौल फैलता है, खासकर तब जब बच्चों की सुरक्षा का सवाल हो। कुछ अभिभावकों का कहना है कि पुलिस द्वारा तुरंत कदम उठाने और जांच तेज़ी से शुरू करने के बावजूद, उन्हें स्थिति को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।

इन स्कूलों में तलाशी अभियान चलाने के दौरान डॉग स्क्वाड, बम निरोधक दस्तों और विशेष सुरक्षा दल की मदद ली गई। यह देखने को मिला कि सुरक्षा एजेंसियां इसका स्रोत पता लगाने के साथ-साथ यह भी निर्धारित करना चाहती हैं कि क्या कोई नेटवर्क या व्यक्ति इस तरह के संदेश भेज रहा है जिससे वास्तविक खतरा उत्पन्न हो सकता है।

प्रभाव और आगे की कार्रवाई

“अहमदाबाद-नोएडा स्कूलों को बम धमकी” मिलने के बाद अहम् सवाल यह उठता है कि इस तरह की धमकियों ने शिक्षा के माहौल को कैसे प्रभावित किया है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के समय सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा परीक्षण है क्योंकि वे छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि संदेश का स्रोत क्या है और किसका उद्देश्य था।

इसके अतिरिक्त, पुलिस ने संभावित स्रोतों के बारे में और विस्तृत जांच जारी रखी है और साइबर सेल तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से भी सहयोग लिया जा रहा है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि ऐसे धमकी भरे ई-मेल कई बार हास्यास्पद या फर्जी सामग्री वाले होते हैं, लेकिन हर बार जांच करना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

इस तरह के मामलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार निगरानी, ई-मेल स्रोत की जाँच, और स्कूलों तथा समुदाय के बीच बेहतर संवाद होना चाहिए ताकि ऐसी धमकियों के प्रभाव को कम किया जा सके। अभिभावक संघों और स्कूल प्रबंधन को भी इस मामले पर नियमित जानकारी साझा करने का आग्रह किया गया है ताकि माता-पिता को पूर्ण जानकारी मिले और उनके मन में किसी भी प्रकार का भय न रह सके।