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सनातन धर्म विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द की

 22 Jan 2026

सनातन धर्म को लेकर देशभर में चले राजनीतिक और वैचारिक विवाद के बीच सनातन धर्म विवाद से जुड़े एक अहम मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। यह मामला तमिलनाडु में सनातन धर्म पर दिए गए बयान और उस पर सोशल मीडिया के माध्यम से की गई प्रतिक्रिया से जुड़ा था, जिसने सनातन धर्म विवाद को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया था।


क्या था पूरा विवाद?


यह विवाद तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर एक टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद सनातन धर्म विवाद को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। इसी क्रम में बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के बयान की आलोचना की थी।

इस पोस्ट के बाद तमिलनाडु में अमित मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। आरोप लगाया गया कि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इससे समाज में वैमनस्य फैल सकता है। इसी आधार पर सनातन धर्म विवाद से जुड़ा आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

मद्रास हाईकोर्ट का फैसला


मद्रास हाईकोर्ट ने सनातन धर्म विवाद से संबंधित इस मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक या धार्मिक मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना या असहमति जताना अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान का मूल अधिकार है और इसे केवल आलोचनात्मक होने के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अमित मालवीय की सोशल मीडिया पोस्ट किसी भी तरह से हिंसा, घृणा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के उद्देश्य से नहीं की गई थी। इसलिए सनातन धर्म विवाद के इस प्रकरण में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर


अपने फैसले में हाईकोर्ट ने लोकतंत्र में स्वतंत्र विचार और आलोचना के महत्व को रेखांकित किया। अदालत ने टिप्पणी की कि राजनीतिक बहस और वैचारिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा हैं। Sanatana Dharma controversy जैसे मुद्दों पर असहमति को अपराध मान लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं


फैसले के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत बताया है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय दिखाता है कि कानून का उपयोग राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं का मत है कि Sanatana Dharma controversy जैसे संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर बयान देते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।

निष्कर्ष


सनातन धर्म विवाद से जुड़े इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द किया जाना न केवल एक कानूनी राहत है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी पुष्टि करता है। Sanatana Dharma row पर आया यह फैसला भविष्य में राजनीतिक अभिव्यक्ति, सोशल मीडिया और कानून के संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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