15 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षण आया, जब राज्यभर की 29 महानगरपालिका और नगर निकायों के लिए मतदान सुबह 7.30 बजे शुरू हुआ। यह Maharashtra election अपने आप में एक बड़ा लोकतांत्रिक उत्सव है, क्योंकि 2,869 सीटों पर कुल 3.48 करोड़ मतदाता ने 15,931 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए वोट डाले। इस चुनाव की सबसे बड़ी नज़रे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पुणे महानगरपालिका की ओर टिक गईं, जहां राजनीतिक दलों के बीच निर्णायक जंग दर्ज की जा रही है।
राज्य की राजनीति में इस महाराष्ट्र चुनाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि छह साल से अधिक समय बाद ये स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं, और बड़े राजनीतिक समीकरण अब आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिष्ठा, विकास एजेंडा और दलों के भविष्य की दौड़ जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रही है।
मतदान का हाल-चाल: उच्च मतदाताओं की भागीदारी और सुरक्षा-व्यवस्था: महाराष्ट्र चुनाव
आज के महाराष्ट्र चुनाव में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यापक रूप से जारी रही। सुबह के शुरुआती हिस्से में ही 7% से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो यह संकेत देता है कि मतदाता सुबह से ही सक्रिय रहे।
राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने 70% से अधिक मतदान लक्ष्य निर्धारित किया है और प्रशासन द्वारा मतदाता सुख-सुविधा केंद्रों, पानी, छाया, वृद्धों और विकलांगों के लिए प्राथमिक ध्यान देने जैसी व्यापक व्यवस्थाएँ की गई हैं।
मतदान केंद्र और सुरक्षा:
- राज्यभर में 39,092 मतदान केंद्र बनाए गए।
- पुलिस और होमगार्ड की बड़ी तैनाती के साथ 25,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी बीएमसी समेत प्रमुख शहरों में नियुक्त किए गए हैं।
- बीएमसी ने पहली बार चुनावी वाहनों की ट्रैकिंग के लिए जियोफेंसिंग तकनीक का उपयोग किया, जिससे चुनाव संबन्धी लॉजिस्टिक्स और समयबद्ध डिलीवरी पर नियंत्रण बढ़ा है।
लोकप्रिय हस्तियों का मतदान:
बहुत से सेलिब्रिटीज़ जैसे बॉलीवुड सितारे और खेल जगत के दिग्गज सुबह-सुबह वोट डालते दिखे, जिससे आम जनता में मतदान के प्रति उत्साह और बढ़ा।
सीवरेज से लेकर भरोसे तक:
आरएसएस प्रमुख ने मतदान करते समय आत्मीय अपील की कि मतदान एक जिम्मेदारी है और सभी मतदाता इसे निभाएँ।
मुंबई और पुणे में सियासी भिड़ंत: हाई-स्टेक्स मुकाबला
सबकी निगाहें विशेष रूप से मुंबई BMC चुनाव और पुणेनगरपालिका पर टिकी हुई हैं, क्योंकि दोनों शहर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर राज्य की नब्ज़ माने जाते हैं।
मुंबई में मुकाबला:
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में कुल 227 सीटों पर 1,700 से ज्यादा उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जहाँ भाजपा-शिवसेना (शिंदे) की महायुति गठबंधन तथा उद्धव-राज ठाकरे की शिवसेना-NCP-MNS गठबंधन के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है।
बीएमसी का वार्षिक बजट लगभग ₹74,000 करोड़ है, जो इसे देश का सबसे बड़ा शक्तिशाली नगर निकाय बनाता है और यही वजह है कि यहाँ जीतना किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रतिष्ठा की बात भी है।
पुणे में सियासी हलचल:
पुणे महानगरपालिका में भी चुनाव का माहौल गरम है, जहां राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की झड़पें कांग्रेस, NCP और अन्य स्थानीय दल के बीच दिखाई दे रही हैं।
राजनीतिक समीकरण:
हाल ही में NCP की दो अलग-अलग शाखाओं के बीच मिलकर पुणे चुनावों के लिए साझा घोषणा की गई है, जो दर्शाता है कि पारंपरिक राजनीतिक रणनीतियाँ भी बदल रही हैं।
इस मुकाबले की नतीजे राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेंगे, विशेषकर जब अगले साल विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं।
विवाद, शिकायतें और चुनावी मुद्दे
हर चुनाव की तरह इस Maharashtra election में भी कुछ विवाद और चिंताएँ सामने आई हैं।
डुप्लिकेट मतदाता सूची: विपक्षी दलों ने चुनाव से पहले मतदाता सूची में 10 लाख से अधिक डुप्लिकेट या गलत प्रविष्टियों के बारे में चिंता जताई है, विशेषकर पुणे और अन्य नगर निकायों में। प्रशासन ने इसका सत्यापन और सुधार प्रक्रिया शुरू की है।
नामांकन के दौरान हास्यास्पद घटनाएँ: पुणे में एक उम्मीदवार ने चुनावी फॉर्म निगल लिया था, जिससे जांचकर्ताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रतिद्वंद्वियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप: कुछ सोशल मीडिया चर्चाओं में पहले से ही मिलकर जीत की स्थितियाँ जैसे कि कुछ जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने की खबरें भी सामने आईं, जिनको लेकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाये गए हैं।