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भारत में गिग वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन के बाद,10 मिनट डिलीवरी समय सीमा हटाई

 13 Jan 2026

सरकार ने डिलीवरी बॉयज़ की सुरक्षा को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को प्राइवेट कंपनी और श्रम मंत्रालय के बीच हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। जिसमें 10 मिनट की डिलीवरी पर रोक लगा दी गई है। इसको लेकर विभाग ने देश की प्रमुख ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों जैसे स्विगी, जोमैटो से बात भी की है।

10 मिनट डिलीवरी समय सीमा हटाई


यह मामला गिग वर्कर्स की भारत में विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया है। इस बीच केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षा को लेकर हस्तक्षेप किया है। जिसमें त्वरित वाणिज्य प्लेटफार्मों ने 10 मिनट की डिलीवरी सेवा को हटाने पर सहमति जताई। यह घटना तब सामने आई जब मांडविया ने ब्लिंकइट, जेप्टो, स्विगी और ज़ोमैटो के अधिकारियों के साथ चर्चा की और उन्हें डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा के हित में सख्त डिलीवरी समय सीमा में ढील देने की सलाह दी। जिसके बाद सभी कंपनी ने सरकार को आश्वासन दिया कि वो अपने ब्रेंड ऐड सोशल मीडिया से डिलीवरी की समय सीमा हटाएंगे।


गिग वर्कर्स की हड़ताल


इससे पहले न्यू ईयर के समय गिग वर्कर्स ने भारत में विरोध प्रदर्शन किया था। जिसमें 10 मिनट की डिलीवरी सुविधा को हटाने और पहले की भुगतान संरचना को बहाल करने की मांग की गई है। यह हड़ताल इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (आईएफएटी) के बैनर तले आयोजित की गई थी। जिसमें स्विगी, ज़ोमैटो, ज़ेप्टो और अमेज़न जैसी कंपनियों से जुड़े डिलीवरी कर्मचारियों और ड्राइवरों का प्रतिनिधित्व देखा गया।

देश में कई साल से गिग वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन के मामले सामने आ रहे थे। 2023 में भी गिग वर्कर्स ने सार्वजनिक तौर पर डिलीवरी करने से इनकार कर दिया था। 2025 में भी ऐसा ही देखने को मिला, जब गिग वर्कर्स ने 25 दिसम्बर से लेकर 31 दिसम्बर तक हड़ताल कर दी थी। जिसके बाद से ही उनकी सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। अब सरकार ने इस बात पर अपना रुख साफ कर दिया है और बड़ा फैसला लिया है, क्योंकि 10 मिनट की डिलीवरी के चक्कर में कई सारे मामले ऐसे सामने आ रहे थे, जहां पर डिलीवरी पार्टनर्स जल्दी सामान पहुंचाने के लिए तेजी से जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। लेकिन अब इसे लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

सरकार ने बैठक में अपना रुख साफ़ रखते हुए कहा कि ब्लिंकइट की डिलीवरी नीति में बदलाव किया जा सकता है। भारत में गिग इकॉनमी के कर्मचारी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही हैं। 2025 तक भारत में लगभग 80 लाख से ज्यादा लोग गिग इकोनॉमी (डिलीवरी, कैब आदि) से जुड़ी हैं। वहीं नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक यह संख्या बढ़कर 2.35 करोड़ हो सकती है।