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धारा 163 लागू-फैज़-ए-इलाही मस्जिद दिल्ली के पास सुरक्षा और तनाव का महल।
09 Jan 2026
दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद दिल्ली के पास धारा 163 क्यों लागू हुई?
दिल्ली में फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीएनएसएस की धारा 163 लागू की गई है। यह कदम इलाके में अनधिकृत सभाओं और भीड़ को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया। दरअसल, अदालत के आदेश के तहत नगर निगम (एमसीडी) ने मस्जिद के पास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन इस दौरान स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव की घटनाओं के कारण हालात तनावपूर्ण हो गए।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद और उसके आसपास धारा 163 लागू कर दी और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी, ताकि किसी भी स्थान पर कानून के खिलाफ भीड़ इकट्ठा न हो सके। इसके बाद पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे नमाज़ घर पर ही अदा करें। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पथराव की घटनाओं में शामिल कई लोगों की पहचान कर ली गई है और कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया गया है।
फैज-ए-इलाही मस्जिद दिल्ली-विवाद और बुलडोजर अभियान की पृष्ठभूमि
दिल्ली की फैज़-ए-इलाही मस्जिद पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित है और यह क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल मानी जाती है। मस्जिद से सटी सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय निवासियों और मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि यह जमीन वक्फ बोर्ड की है और इससे जुड़े कानूनी दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए हैं।
वहीं प्रशासन का दावा है कि मस्जिद परिसर के पास स्थित भूमि का एक अतिरिक्त हिस्सा अवैध रूप से कब्जे में लिया गया था, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के तहत हटाया जाना आवश्यक था। इसी आदेश के पालन में नगर निगम (एमसीडी) ने 7 जनवरी 2026 की रात को कार्रवाई शुरू की।
इस दौरान 32 से अधिक बुलडोज़र, भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। जिन संरचनाओं को हटाया गया, उनमें पुस्तकालय, औषधालय, बैंक्वेट हॉल और अन्य निर्माण शामिल थे, जिन्हें सार्वजनिक भूमि पर अवैध बताया गया। जैसे ही भारी मशीनरी और कर्मी मौके पर पहुंचे, विरोध और अफवाहों के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ लोगों द्वारा पथराव किए जाने के बाद हालात काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस और अन्य नियंत्रण उपायों का सहारा लेना पड़ा।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान मस्जिद की मुख्य इमारत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है और धार्मिक स्थल पूरी तरह सुरक्षित है। कार्रवाई केवल अवैध अतिक्रमण हटाने तक सीमित रही। हालांकि इस घटना के बाद फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सुरक्षा उपाय, गिरफ्तारी और सामुदायिक प्रतिक्रियाएँ
धारा 163 लागू होने के बाद फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास की सड़कों, गलियों और प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी कि वे किसी भी तरह की भीड़ न जुटाएं और शांति बनाए रखें, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पुलिस के अनुसार, पथराव की घटनाओं के बाद कई लोगों की पहचान कर ली गई है और आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने न केवल पुलिस पर पत्थर फेंके, बल्कि सरकारी लाउडस्पीकर छीनने का भी प्रयास किया, जिससे कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए CCTV फुटेज, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।
इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ राजनीतिक नेताओं ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को सही ठहराया है, जबकि अन्य ने स्थानीय समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण और संवाद आधारित समाधान की अपील की है। वहीं कुछ समूहों ने इस पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायिक और प्रशासनिक आदेशों के पालन में की गई है।
धारा 163 लागू होने के बाद फैज़-ए-इलाही मस्जिद क्षेत्र के व्यापारियों, स्थानीय निवासियों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने माना कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए कड़े सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को संभालते समय धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द का विशेष ध्यान रखा जाए।
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