Article

आशा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन, वेतन बढ़ोतरी की मांग

 08 Jan 2026

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार को आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन किया। सैकड़ों की संख्या में जुटी महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन और तय मासिक वेतन की मांग को प्रमुखता से उठाया।

आशा कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा में अपनी भूमिका पर प्रकाश डालती हैं।


आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे गांवों और शहरी गरीब इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, परिवार नियोजन, पोषण अभियान और कोरोना जैसी महामारी के समय उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। इसके बावजूद उन्हें स्थायी वेतन नहीं मिलता और केवल प्रोत्साहन राशि पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी असमानता के खिलाफ आशा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन।

 मुख्य मांगें: निश्चित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की स्थिति


प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें कम से कम 15,000 प्रति माह मानदेय दिया जाए, साथ ही पेंशन, भविष्य निधि और स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिले। उनका यह भी कहना है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। आशा यूनियनों का आरोप है कि कई बार ज्ञापन देने और बातचीत के बावजूद सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए।

विरोध प्रदर्शन के दौरान यातायात व्यवधान और राजनीतिक समर्थन


इस आंदोलन के दौरान कुछ इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए तैनात किया गया। कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। नेताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं की अनदेखी करना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए घातक हो सकता है। इसी कारण आशा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन और अपनी आवाज बुलंद की।

विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ने की चेतावनी दी है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन आने वाले समय में और व्यापक रूप ले सकता है। पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में भी आशा कार्यकर्ता एकजुट हो रही हैं। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

आशा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया


फिलहाल आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह विरोध प्रदर्शन देशभर में आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति, अधिकार और सम्मान को लेकर एक अहम बहस को जन्म दे रहा है।

Read This Also:- अमेरिका की ग्रीनलैंड हासिल करने की योजना से बढ़ी वैश्विक हलचल।