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अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला: मादुरो की गिरफ्तारी ने बढ़ाई वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ
06 Jan 2026
अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला: घटना, पृष्ठभूमि और सटीक विवरण
3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला का आदेश दिया, जिसे “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” के नाम से जाना जा रहा है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास सहित कई इलाकों पर भीषण हमले किए और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले गया।
संयुक्त राज्य के अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का लक्ष्य मादुरो को रोकना और उनके खिलाफ चल रहे ड्रग तस्करी, नार्को-आतंकवाद और अन्य गंभीर आरोपों के तहत उन्हें हिरासत में लेना था। इस भारी सैन्य अभियान में लगभग 150 अमेरिकी लड़ाकू विमानों और विशेष बलों ने भाग लिया, जिससे पूरे वेनेजुएला में व्यापक विनाश और सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा हो गई।
अमेरिका का कहना है कि यह ऑपरेशन केवल अपराधों और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई है, लेकिन वहीं कई देश इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मान रहे हैं। इस अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला ने न केवल लैटिन अमेरिका बल्कि वैश्विक राजनीति को भी हिला दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: समर्थन, विरोध और वैश्विक राजनीति
अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला के तुरंत बाद दुनिया भर से प्रतिक्रिया आई, जिसमें समर्थन के साथ-साथ तीखी आलोचना भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए इमरजेंसी बैठक बुलाई है और अंतरराष्ट्रीय कानून एवं संप्रभुता के उल्लंघन के आरोपों पर विचार कर रहा है।
रूस और चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और अमेरिका पर “सैन्य आक्रामकता” का आरोप लगाया है। इन देशों का कहना है कि किसी भी स्थिति में एक संप्रभु देश पर अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला और उसके राष्ट्रपति की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और यह विश्व शांति के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है।
भारत ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और संयम तथा संवाद के जरिए समाधान की अपील की है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वेनेज़ुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उसी समय अमेरिका के अंदर भी इस ऑपरेशन को लेकर मतभेद सामने आए। कुछ राजनेताओं ने इसे “ग़ैरकानूनी और असमझदारी भरा निर्णय” बताया है, जबकि कुछ समर्थक इसे आतंक और ड्रग तस्करी के खिलाफ फैसला बताते हुए इसे आवश्यक कर्यक्रम कह रहे हैं।
मादुरो की गिरफ्तारी के प्रभाव: राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा आयाम
अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला के परिणामस्वरूप मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ को अस्थायी राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि देश की राजनीतिक अस्थिरता और अंतरिम शासन मॉडल पर गंभीर बहस हो रही है।
इस हमले से आर्थिक बाज़ारों पर भी असर पड़ा है। वेनेज़ुएला की तेल उत्पादन क्षमता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का जोखिम बढ़ गया है, जिससे तेल की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का वेनेज़ुएला हमला के फैसले के पीछे तेल संसाधनों पर नियंत्रण की भू-राजनीतिक प्राथमिकताएँ भी काम कर रही हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह घटना चिंता का विषय है। हमले के दौरान कथित तौर पर कई नागरिक और सैनिकों की मौत हुई है, जिसमें सीमा पार से कई विदेशी नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं। इसने क्षेत्रीय अस्थिरता और प्रतिशोध की संभावनाओं को बढ़ा दिया है, जिससे लैटिन अमेरिका में सुरक्षा खतरे और बढ़ गए हैं।