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ममता बनर्जी का 71वां जन्मदिन: भारतीय राजनीति की सबसे सशक्त महिला नेता

 05 Jan 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। ममता बनर्जी के 71वें जन्मदिन के मौके पर उनकी राजनीतिक यात्रा और योगदान पर पूरे देश की नजर है। 71 वर्ष की उम्र में भी उनकी ऊर्जा, सक्रियता और राजनीतिक पकड़ उन्हें देश की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करती है। वह न केवल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, बल्कि भारत की एकमात्र ऐसी महिला हैं जिन्होंने लंबे समय तक एक बड़े राज्य का नेतृत्व किया है।

कोलकाता की सड़कों से मुख्यमंत्री कार्यालय तक का सफर


ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। कोलकाता की सड़कों से शुरू हुआ उनका संघर्ष संसद और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने बाद में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों से चले आ रहे वामपंथी शासन को खुली चुनौती दी। वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने राज्य की राजनीति की दिशा ही बदल दी। ममता बनर्जी के 71वें जन्मदिन पर यह संघर्षपूर्ण सफर और भी अधिक प्रेरणादायक नजर आता है।

सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस


मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी ने सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष जोर दिया। कन्याश्री, सबूज साथी, स्वास्थ्य साथी और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं ने राज्य के गरीबों, महिलाओं और छात्रों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। खासतौर पर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनकी नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। यही कारण है कि ममता बनर्जी के 71वें जन्मदिन के अवसर पर उन्हें नारी सशक्तिकरण की मजबूत आवाज के रूप में याद किया जा रहा है।

जमीनी नेतृत्व और अलग राजनीतिक शैली


ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनका जमीनी नेतृत्व है। वे सत्ता में रहते हुए भी आम लोगों के बीच रहना पसंद करती हैं। धरना, पदयात्रा और सड़क पर उतरकर विरोध करना उनके राजनीतिक अंदाज का अहम हिस्सा रहा है। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ उन्होंने कई बार खुलकर मोर्चा लिया, जिससे वे राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरे के रूप में उभरीं।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता प्रभाव


राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी को विपक्षी एकता की अहम कड़ी माना जाता है। लोकसभा चुनावों में उनकी भूमिका और भाजपा के खिलाफ उनकी आक्रामक रणनीति ने उन्हें देश की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बना दिया है। ममता बनर्जी का 71वां जन्मदिन यह साबित करता है कि उनका राजनीतिक प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं है।

सादगी और जनता से जुड़ाव की मिसाल


व्यक्तिगत जीवन में ममता बनर्जी सादगी की मिसाल हैं। साधारण साड़ी, चप्पल और बेहद सामान्य रहन-सहन उनके व्यक्तित्व को अन्य नेताओं से अलग बनाता है। सत्ता और वैभव से दूर रहकर जनता के बीच रहने का उनका अंदाज उन्हें खास बनाता है।

निष्कर्ष


निष्कर्षतः, ममता बनर्जी सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में साहस, आत्मनिर्भरता और जनसंघर्ष की जीवंत मिसाल हैं। उनका राजनीतिक सफर यह साबित करता है कि दृढ़ निश्चय और जनता से जुड़े रहकर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

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