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Personality Rights Of Andhra Pradesh पर दिल्ली उच्च न्यायालय का जॉन डो आदेश।

 02 Jan 2026

दिल्ली: भारत के कानूनी इतिहास में एक महत्वपूर्ण प्रीसेडेंट सेट करने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने “Personality Rights Of Andhra Pradesh” के तहत राज्य के उपमुख्यमंत्री और सिनेमा जगत के प्रसिद्ध अभिनेता पवन कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण जॉन डू ऑर्डर पारित किया है।


यह आदेश उन मामलों में से एक है जहाँ अदालत ने न केवल सार्वजनिक व्यक्ति की प्रतिष्ठा और पहचान की रक्षा की है, बल्कि डिजिटल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उसके नाम, छवि, आवाज और पहचान के अनधिकृत उपयोग को भी रोका है। इस निर्णय को लॉ जगत और डिजिटल अधिकार विशेषज्ञों ने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

जॉन डू ऑर्डर और “Personality Rights Of Andhra Pradesh” का कानूनी महत्व


दिल्ली हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश जस्टिस मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की अध्यक्षता में दिए गए इस आदेश के जरिए अदालत ने स्पष्ट किया कि Personality Rights Of Andhra Pradesh के तहत किसी भी व्यक्ति की पहचान से जुड़े तत्व जैसे नाम, तस्वीर, आवाज, छवि और लाइकनेस किसी भी तीसरे पक्ष द्वारा बिना अनुमति के वाणिज्यिक इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।

इस आदेश का मूल उद्देश्य पवन कल्याण की पहचान और प्रतिष्ठा को डिजिटल माध्यमों पर होने वाली अनधिकृत और संभावित रूप से हानिकारक गतिविधियों से बचाना है। अदालत ने कहा कि उस तरह के इस्तेमाल से व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों तरह के नुकसान की आशंका रहती है। यही कारण है कि अदालत ने e-commerce प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स को तत्काल ऐसे किसी भी सामग्री को हटाने के निर्देश दिए हैं जो पवन कल्याण की पहचान का दुरुपयोग कर रही थीं।

विशेष रूप से, अदालत ने यह साफ कर दिया कि Personality Rights Of Andhra Pradesh की रक्षा केवल पारंपरिक मीडियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीकों और डिजिटल एडिटिंग के ज़रिए किसी भी रूप में की गई पहचान की नकल पर भी रोक लगाई जाएगी।

आदेश का प्रभाव: सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स


दिल्ली हाई कोर्ट ने Personality Rights Of Andhra Pradesh की उल्लंघन के खिलाफ सिर्फ व्यक्तिगत याचिकाओं के आधार पर ही कार्य नहीं किया, बल्कि डिजिटल दुनिया के सभी मुख्य पहियों—सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और बड़े टेक कंपनियों—पर भी आदेश लगाया।

सोशल मीडिया और फैन पेजेस

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि फैन पेज या प्रशंसक खाते पवन कल्याण से संबंधित सामग्री साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने खाते में स्पष्ट रूप से “फैन अकाउंट” का डिस्क्लेमर जोड़ना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो उन सामग्री खातों को निष्क्रिय किए जाने का खतरा होगा। अदालत ने Meta (फेसबुक और इंस्टाग्राम) को यह आदेश भी जारी किया कि वह ऐसे खातों से बुनियादी ग्राहक जानकारी उपलब्ध कराए।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स

जहाँ तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का सवाल है, अदालत ने अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो जैसे बड़े नामों को निर्देश दिया है कि जो उत्पाद पवन कल्याण के चित्र, नाम या आवाज का बिना अनुमति के वाणिज्यिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें तत्काल वेबसाइट से हटाया जाए और संबंधित विक्रेताओं का विवरण भी उपलब्ध कराया जाए।

एआई और तकनीकी दुरुपयोग

आज की डिजिटल दुनिया में जहाँ AI और डीपफेक तकनीक का उपयोग बढ़ता जा रहा है, अदालत ने Personality Rights Of Andhra Pradesh को डिजिटल तकनीक से होने वाले अनुचित उपयोग से भी सुरक्षित रखने का जिम्मा लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि AI से उत्पन्न सामग्री भी किसी व्यक्ति की पहचान की अवैध निगरानी, छवि या आवाज के उपयोग के दायरे में आती है और इसे बिना अनुमति उपयोग नहीं किया जा सकता।

पवन कल्याण की याचिका: मुद्दे, दावे और आगे की कार्यवाही


पवन कल्याण की ओर से दायर याचिका में अदालत को बताया गया कि कई वेबसाइटों, विक्रेताओं और सोशल मीडिया खातों द्वारा उनके नाम, आवाज और तस्वीरों का उपयोग बिना अनुमति के वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। इन वेबसाइटों पर टी-शर्ट, मग, की-चेन, स्टिकर्स जैसी सामग्री पर उनके फोटो और नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे उन्हें प्रतिष्ठा और व्यावसायिक नुकसान हो रहा था।

वकील ने यह भी अदालत को बताया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म AI तकनीक का उपयोग करके उनकी आवाज़ और छवि की नकल कर रहे हैं, जिससे गलत सामग्री फैलाई जा रही है। अदालत ने इस बात पर गंभीरता से विचार किया और पाया कि याचिका में प्रमुख तथ्य मौजूद हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने देखा कि पवन कल्याण अपने क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय के सार्वजनिक और राजनीतिक अनुभव के साथ एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। इसी प्रतिष्ठा और पहचान को देखते हुए अदालत ने यह आदेश पारित किया कि यदि उनकी मान्यता और पहचान के तत्वों को कोई बिना अनुमति के उपयोग करता है, तो यह कानूनी उल्लंघन होगा, और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। आगे की सुनवाई अब 12 मई 2026 को तय की गई है, जहाँ अदालत इस आदेश के पालन की पुष्टि करेगी और यदि आवश्यक हुआ तो और कदम उठाए जा सकते हैं।