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हिजाब विवाद: “हिजाब हटाना या हदें लांघना? नीतीश कुमार की हरकत पर देश भर में सवाल”
17 Dec 2025
हिजाब विवाद का तूल पकड़ता महासभा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ एक बेहद गंभीर हिजाब विवाद ने देश भर में राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस छेड़ दी है। सोमवार को पटना में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री ने एक युवा महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब (veil) अचानक हटाया, तो घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि यह न केवल व्यक्तिगत आज़ादी और गरिमा के ख़िलाफ़ है, बल्कि यह महिला सम्मान और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।
घटना उस समय हुई जब आउष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे। हिजाब पहनी महिला डॉक्टर जब मुख्यमंत्री से अपना पत्र लेने के लिए आई, तो उन्होंने हैरानी जताते हुए उसका हिजाब खींच लिया। यह दृश्य घटनास्थल पर और बाद में सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का विषय बन गया। विपक्ष के नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री की “अनुचित हरकत” करार देते हुए उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और संवैधानिक अधिकारों का सवाल
इस हिजाब विवाद पर राजनीतिक विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अलग-अलग राजनीतिक समूहों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने न केवल एक महिला की निजता का उल्लंघन किया, बल्कि उसके धर्म और व्यक्तिगत विचार को भी ठेस पहुँचाई। RJD ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली को “दयनीय” कहा है और कहा कि ऐसा कृत्य किसी भी संवैधानिक नेता के लिए अनुकूल नहीं है।
सपा सांसद इकरा हसन ने इस मामले को सीधा महिला सम्मान और संवैधानिक अधिकार से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की यह हरकत “सम्मानहीन और अस्वीकार्य” है, और इससे यह सवाल उठता है कि क्या एक सार्वजनिक पदधारी को महिलाओं के अधिकारों का सम्मान है या नहीं।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने भी कहा है कि हिजाब पहनने का निर्णय व्यक्तिगत और धार्मिक अधिकार के अंतर्गत आता है, और किसी भी सार्वजनिक पदधारी को ऐसा कोई कदम उठाने का अधिकार नहीं देना चाहिए।
सफाई, बचाव और समाज पर प्रभाव
इस हिजाब विवाद के बाद मुख्यमंत्री के समर्थक और कुछ नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। बिहार सरकार के कुछ पदाधिकारियों ने कहा है कि मुख्यमंत्री का इरादा कोई अपमानजनक कृत्य नहीं था, बल्कि उन्होंने ऐसा उस महिला डॉक्टर की उपलब्धि को उजागर करने के लिए किया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की उम्र और “पितृवत व्यवहार” को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।
हालांकि, यह सफाई विपक्ष और समाज के बड़े हिस्से द्वारा स्वीकार नहीं की जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि ऐसा कदम किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अस्वीकार्य है और इससे सभी वर्गों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है।
सोशल मीडिया पर भी हिजाब विवाद को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं — कुछ लोग इसे “अनुचित व्यवहार” बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक खेल कहा गया है। वायरल वीडियो पर लोग अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं, और यह मुद्दा व्यापक रूप से ट्रेंड कर रहा है।