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तमिलनाडु में “Sir” विवाद: DMK Supreme Court Petition
02 Feb 2026
तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर DMK Supreme Court Petition ने नया विवाद खड़ा किया है। DMK ने Tamil Nadu Electoral Rolls में "Sir" शब्द के उपयोग को असंवैधानिक बताते हुए इसकी आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की दिशा में एक कदम हो सकता है। हाल ही में, Tamil Nadu Electoral Rolls के डिजिटलीकरण के दौरान कुछ स्थानों पर मतदाताओं के नामों के आगे "Sir" जुड़ने की खबरें आई थीं। DMK का तर्क है कि यह कदम जाति और सामाजिक पदानुक्रम को बढ़ाता है और नागरिकों के बीच समानता की भावना को कमजोर करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
“Sir” शब्द पर डीएमके का आरोप: भेदभाव और De facto NRC की ओर इशारा
DMK ने कहा कि "Sir" शब्द विशेष वर्गों के लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे समाज में ऊंच-नीच की धारणा पैदा होती है। पार्टी ने इसे "De facto NRC" की संज्ञा दी है, यह तर्क करते हुए कि यह नागरिकों को वर्गों में बांटने की प्रक्रिया है जो भविष्य में नागरिकता के विवाद का कारण बन सकती है। इस DMK Supreme Court Petition में पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया जाए कि ऐसे सभी शब्द हटाए जाएं जो भेदभाव या असमानता को दर्शाते हैं और Tamil Nadu Electoral Rolls को पूरी तरह निष्पक्ष और समान बनाया जाए।
निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया और विपक्ष की आलोचना
भारत निर्वाचन आयोग ने इस DMK Supreme Court Petition पर कहा है कि वह मामले की जांच कर रहा है और अगर "Sir" शब्द इस्तेमाल हुआ है, तो यह स्थानीय अधिकारियों की ओर से हुई त्रुटि हो सकती है, न कि केंद्र द्वारा लिया गया निर्णय। निर्वाचन आयोग ने समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
डीएमके की याचिका के बाद विपक्षी दलों, जैसे एआईएडीएमके और भाजपा, ने आरोप लगाया है कि DMK मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने DMK की पहल की प्रशंसा की है और कहा कि DMK Supreme Court Petition चुनावी पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कानूनी दृष्टिकोण और संभावित प्रभाव
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DMK का तर्क सही ठहराया जाता है, तो इससे भारत की मतदाता सूचियों के मानकीकरण पर प्रभाव पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि Tamil Nadu Electoral Rolls में सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग संवैधानिक रूप से सही है या नहीं।
इस प्रकार, यह DMK Supreme Court Petition न केवल तमिलनाडु के लिए, बल्कि पूरे देश में चुनावी पारदर्शिता, समानता और नागरिक अधिकारों पर नई बहस का आरंभ कर रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट DMK के पक्ष में निर्णय देता है, तो इससे भारतीय लोकतंत्र में भेदभाव रहित मतदाता पहचान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा सकता है।
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