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पश्चिम बंगाल राजनीति: ममता बनर्जी के सहयोगी के बयान पर भाजपा का हमला
02 Feb 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक करीबी सहयोगी के विवादास्पद बयान ने राज्य के राजनीतिक माहौल को हिला दिया है। इस सहयोगी ने कथित तौर पर चुनाव आयोग (Election Commission) के अधिकारियों के खिलाफ “टांग तोड़ दो” जैसी टिप्पणी की, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर हमला बोला है।
विवादित बयान से मचा राजनीतिक तूफान
रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के इस सहयोगी ने एक स्थानीय कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करे, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाओ — जिसमें उन्होंने “टांग तोड़ दो” जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इस बयान को भाजपा ने लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करार दिया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह टिप्पणी न केवल असंवैधानिक है बल्कि राज्य में राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा, “टीएमसी नेता का यह बयान दर्शाता है कि वे संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करते। चुनाव आयोग को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
टीएमसी का बचाव: बयान को बताया संदर्भ से बाहर
इस विवाद पर तृणमूल कांग्रेस ने बचाव करते हुए कहा कि इस बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। टीएमसी प्रवक्ताओं का कहना है कि सहयोगी ने “टांग तोड़ दो” शब्द का उपयोग प्रतीकात्मक रूप से किया था, और उनका उद्देश्य किसी को हिंसा के लिए उकसाना नहीं था।
टीएमसी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके। पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हमेशा लोकतंत्र, शांति और जनता के अधिकारों की पक्षधर रही हैं।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतज़ार
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने इस पूरे प्रकरण पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, आयोग इस बयान पर टीएमसी से स्पष्टीकरण मांग सकता है। चुनाव आयोग पहले भी पश्चिम बंगाल की पार्टियों को आगाह कर चुका है कि वे अपने भाषणों में संयम बरतें और भड़काऊ भाषा का प्रयोग न करें।
अगर चुनाव आयोग इस मामले में कार्रवाई करता है, तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया जा सकता है। ऐसा कदम राज्य में पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाज़ी का पुराना इतिहास
पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही तीखी बयानबाज़ी और टकराव के लिए जानी जाती रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से टीएमसी और भाजपा के बीच सत्ता संघर्ष लगातार जारी है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक दुरुपयोग के आरोप लगाती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयानों से टीएमसी की छवि को नुकसान हो सकता है, जबकि भाजपा इसे जनता के बीच अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
निष्कर्ष
“टांग तोड़ दो” बयान पर मचा विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में लोकतांत्रिक मर्यादाओं और राजनीतिक भाषा की सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भाजपा जहां इस बयान को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी पर निशाना साध रही है, वहीं टीएमसी इसे साजिश बताकर अपना बचाव कर रही है।
आगामी चुनावों से पहले यह विवाद राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है — क्योंकि इसका असर बंगाल की राजनीति पर सीधा पड़ सकता है।
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