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नीतीश कुमार , चिराग पासवान के घर पहुंचे छठ के बहाने — 2020 की कड़वाहट मिटाने की दिशा में एक संकेत
07 May 2026
छठ के अवसर पर नीतीश कुमार की अचानक चिराग पासवान के घर उपस्थिति
बिहार में इस वर्ष छठ महापर्व के अवसर पर एक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मुलाकात देखने को मिली जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार 26 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्री तथा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के पटना स्थित आवास पर जाकर खरना-प्रसाद ग्रहण किया।
छठ के दूसरे दिन, जब छठव्रती सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में होते हैं, उसी दौरान मुख्यमंत्री ने चिराग के आवास पर परम-संस्कार के रूप में प्रसाद ग्रहण किया।
इस दौरान फोटो-मीडिया में देखा गया कि चिराग पासवान ने नीतीश कुमार का स्वागत किया, उन्हें शॉल देकर अभिनंदन किया, और चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया (X) पर ट्वीट किया:
“धन्यवाद माननीय मुख्यमंत्री जी, जो आज आप मेरे आवास पर आए और खरना का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मेरे परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर छठ महापर्व की शुभकामनाएं देने के लिए हार्दिक आभार।”
“धन्यवाद माननीय मुख्यमंत्री जी, जो आज आप मेरे आवास पर आए और खरना का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मेरे परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर छठ महापर्व की शुभकामनाएं देने के लिए हार्दिक आभार।”
यह मुलाकात उस वक्त हुई है जब बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियाँ जोर शोर से शुरू हो चुकी हैं।
इसलिए इस कदम को सिर्फ धार्मिक या सामाजिक पहल नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है—यह देखना है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच पुरानी कड़वाहट कितनी मिटती है।
2020 से चली आ रही मत भेद की पृष्ठभूमि — नीतीश कुमार-चिराग पासवान की राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच पहले कुछ तनावपूर्ण दौर देखने को मिले थे, खासकर 2020 के बाद।
उल्लेखनीय है कि चिराग पासवान ने समय-समय पर राज्य सरकार के कानून-व्यवस्था, अपराध मामलों, गठबंधन समीकरण आदि पर सवाल उठाए थे, जो राजनीतिक रूप से जेडीयू-एलजेपी के बीच दूरी का संकेत माने गए।
ऐसे में छठ के पावन अवसर पर नीतीश कुमार द्वारा चिराग पासवान के घर जाना, उनके परिवार से मिलना और प्रसाद ग्रहण करना इस दूरी को पाटने का प्रतीक माना जा रहा है।
विशेष रूप से, छठ का सामाजिक और धार्मिक महत्व बिहार में बहुत है—ऐसे दौरान यह मुलाकात जन-भावना को भी टटोलने जैसा कदम माना जा सकता है। राजनीतिक रूप से यह संकेत देता है कि दोनों नेता अब पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ नए समीकरणों की ओर बढ़ सकते हैं, या गठबंधन-गुट में सामंजस्य की नई राह खोज सकते हैं।
आने वाले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में इस मुलाकात के राजनीतिक मायने
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सामने आने के समय यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि चुनाव से पहले ज़रूरी है कि गठबंधन दलों में मेल-मिलाप हो।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रूप में अब भी अगले मुख्यमंत्री की रेस में माना जा रहा है और चिराग पासवान की भूमिका राज्य की युवा राजनीति व दलित-पिछड़ा वोट बैंक में महत्वपूर्ण है। इस मुलाकात के बाद यह अनुमान लगने लगा है कि एनडीए (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन) के भीतर की दरारें कम हो सकती हैं, या नए समीकरण बन सकते हैं।
यदि नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच यह सौहार्द कायम रहता है, तो इसकी असरदार छाया आगामी चुनाव पर पड़ सकती है—विशेषकर सिमांचल, दलित-पिछड़ा क्षेत्रों और युवा मतदाताओं के बीच।
हालाँकि, सिर्फ एक धार्मिक अवसर पर हुई मुलाकात से पूरे राजनीतिक समीकरण नहीं तय हो जाएंगे—सीट-बंटवारा, उम्मीदवार चयन, मत-समर्थन एवं स्थानीय स्तर पर काम जैसे कई पहलू अब भी चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।