Article
भारत- पाकिस्तान मुकाबला: साहिबज़ादा फरहान का वीडियो वाइरल बेट से किया AK-47 चलाने का इशारा
12 May 2026
एशिया कप के सुपर-4 मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को छह विकेट से हराकर शानदार जीत हासिल की। लेकिन इस भारत- पाकिस्तान मैच में खेल भावना से अधिक सुर्खियाँ हल्की-फुल्की इशारों और विवादित हरकतों ने बटोरीं। खासकर पाकिस्तानी गेंदबाज हारिस रउफ और बल्लेबाज साहिबज़ादा फ़रहान की कुछ हरकतों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या क्रिकेट सिर्फ खेल है, या राजनीति का रंग मैदान में उतर आया है?
घटना क्या हुई?
मुकाबला चल रहा था जब भारतीय दर्शक “कोहली, कोहली” के नारे लगा रहे थे। हारिस रउफ, बाउंड्री के करीब फील्डिंग करते हुए, दर्शकों की ओर 6-0 का इशारा करने लगे। इंडिया- पाकिस्तान के मैच में ही उन्होंने मिमिक की कि जैसे एक लड़ाकू जेट गिरा हो। इसके अलावा साहिबज़ादा फ़रहान ने पचास रन पूरे करने के बाद बैट को राइफल की तरह तानी हुई गन की तरह दिखाने जैसा एक जश्न मनाया। मुकाबला चल रहा था जब भारतीय दर्शक “कोहली, कोहली” के नारे लगा रहे थे। हारिस रउफ, बाउंड्री के करीब फील्डिंग करते हुए, दर्शकों की ओर 6-0 का इशारा करने लगे। साथ ही उन्होंने मिमिक की कि जैसे एक लड़ाकू जेट गिरा हो। इसके अलावा साहिबज़ादा फ़रहान ने पचास रन पूरे करने के बाद बैट को राइफल की तरह तानी हुई गन की तरह दिखाने जैसा एक जश्न मनाया।
इंडिया -पाकिस्तान के मैच में 6-0 इशारा कई लोगों को पाकिस्तान द्वारा एक पुरानी दावे की याद दिलाता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के 6 लड़ाकू जेट्स गिराए गए थे। जेट क्रैश जैसा इशारा और “बटन दबाने” जैसा अभिनय उसी दावे की पुष्टि जैसा प्रतीत होता है।फ़रहान की गन जैसा इशारा, क्रिकेट के जश्न से कहीं ज़्यादा राजनीति या सैन्य संघर्ष की झलक देने जैसा माना गया है।
पाकिस्तानी बल्लेबाज़ साहिबज़ादा फरहान द्वारा अर्धशतक के बाद की गई बंदूक जैसी हरकत को संजय राउत ने आतंकवाद का महिमामंडन बताया और इसे पहलगाम अटैक में मारे गए 26 निर्दोष भारतियों की घटना से जोड़ा है। वहीं क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने हारिस रउफ की “गणित सुधरो” जैसी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इतिहास में भारत- पाकिस्तान के मुक़ाबलों में आंकड़ा 6-0 नहीं है। भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने भी टिप्पणी की कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें “फ़ालतू उलझनें” हैं, जिन्हें “मैदान पर सबक दे दिया गया”। दूसरी ओर पाकिस्तान और उसके समर्थक यह कहते हैं कि ऐसी आलोचना सिर्फ़ राजनीतिक उकसावे की प्रतिक्रिया है, और खिलाड़ी सिर्फ़ मैदान की गर्मी में ऐसा कर गए होंगे.।
क्रिकेट बोर्डों (BCCI, PCB) को भारत- पाकिस्तान मैचों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि मैदान पर कोई भी ऐसी हरकत न हो, जो खेल से बाहर के राजनीतिक संघर्षों या सैन्य दावों का समर्थन करती हो। अंपायर या मैच रेफरी स्तर पर चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि इशारों की वीडियो रिकॉर्डिंग से यह साफ हो रहा है कि कई बार ये जानबूझकर किए जाते हैं। दर्शकों को भी समझना चाहिए कि नारेबाज़ी मनोरंजन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वह खिलाड़ियों की भावनाएँ भड़काने वाली नहीं होनी चाहिए।
Read This Also:- जब यूरोप की सड़कों पर भड़के विरोध, अटल बिहारी की रणनीति भारत के लिए क्यों जरूरी है
इशारों का मतलब क्या माना जा रहा है?
इंडिया -पाकिस्तान के मैच में 6-0 इशारा कई लोगों को पाकिस्तान द्वारा एक पुरानी दावे की याद दिलाता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के 6 लड़ाकू जेट्स गिराए गए थे। जेट क्रैश जैसा इशारा और “बटन दबाने” जैसा अभिनय उसी दावे की पुष्टि जैसा प्रतीत होता है।फ़रहान की गन जैसा इशारा, क्रिकेट के जश्न से कहीं ज़्यादा राजनीति या सैन्य संघर्ष की झलक देने जैसा माना गया है।
विरोध और प्रतिक्रियाएँ विरोध और प्रतिक्रियाएँ
पाकिस्तानी बल्लेबाज़ साहिबज़ादा फरहान द्वारा अर्धशतक के बाद की गई बंदूक जैसी हरकत को संजय राउत ने आतंकवाद का महिमामंडन बताया और इसे पहलगाम अटैक में मारे गए 26 निर्दोष भारतियों की घटना से जोड़ा है। वहीं क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने हारिस रउफ की “गणित सुधरो” जैसी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इतिहास में भारत- पाकिस्तान के मुक़ाबलों में आंकड़ा 6-0 नहीं है। भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने भी टिप्पणी की कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें “फ़ालतू उलझनें” हैं, जिन्हें “मैदान पर सबक दे दिया गया”। दूसरी ओर पाकिस्तान और उसके समर्थक यह कहते हैं कि ऐसी आलोचना सिर्फ़ राजनीतिक उकसावे की प्रतिक्रिया है, और खिलाड़ी सिर्फ़ मैदान की गर्मी में ऐसा कर गए होंगे.।
आगे क्या होना चाहिए?
क्रिकेट बोर्डों (BCCI, PCB) को भारत- पाकिस्तान मैचों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि मैदान पर कोई भी ऐसी हरकत न हो, जो खेल से बाहर के राजनीतिक संघर्षों या सैन्य दावों का समर्थन करती हो। अंपायर या मैच रेफरी स्तर पर चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि इशारों की वीडियो रिकॉर्डिंग से यह साफ हो रहा है कि कई बार ये जानबूझकर किए जाते हैं। दर्शकों को भी समझना चाहिए कि नारेबाज़ी मनोरंजन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वह खिलाड़ियों की भावनाएँ भड़काने वाली नहीं होनी चाहिए।
Read This Also:- जब यूरोप की सड़कों पर भड़के विरोध, अटल बिहारी की रणनीति भारत के लिए क्यों जरूरी है