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बलिया, हाथरस और कठुआ कांड है रामराज्य की असली तस्वीर! जहां भक्षकों के लिए BJP नेता बन जाते हैं रक्षक

 17 Oct 2020

“एक समय था जब जातिवाद, लड़ाई-झगड़े और समाज को तोड़ने के प्रयास किए जाते थे लेकिन जब से सत्ता की बागडोर पीएम मोदी ने संभाली है तब से ये सब खत्म हो चुके हैं.” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार में एक चुनावी रैली को संबोधित हुए ये बयान दिया था.

जातिवाद को जड़ से खत्म करने की बात करने वाले नड्डा की बात तब खोखली हो जाती है, जब बलिया में एक युवक की सीओ-एसडीएम के सामने खुलेआम हत्या होती है और वहां के विधायक सुरेंद्र सिंह हत्यारोपी का इसलिए खुलकर समर्थन कर रहे हैं क्योंकि वह क्षत्रिय समाज से संबंध रखता है.

वे खुलेआम मीडिया से कहते हैं कि एक्शन के बाद रिएक्शन तो आता ही है. आरोपी ने जो किया वह अपनी जान बचाने के लिए किया था और मैं समर्थन इसलिए कर रहा हूं क्योंकि वह क्षत्रिय है. वे ये भी स्वीकार कर चुके हैं कि आरोपी ने चुनाव में उनके लिए काम किया था, वो उनका बेहद करीबी है, इसलिए वे उसके साथ हैं.

लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. सच्चाई ये है कि मृत युवक पाल समुदाय से था और हत्यारोपी धीरेंद्र सिंह क्षत्रिय था इसलिए यहां भाजपा विधायक ओबीसी-जनरल एंगल देने की कोशिश में जुटे हैं. वे हत्यारोपी के परिवार से मिले भी, उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उन्हें न्याय दिलाकर ही दम लेंगे. इस दौरान वे फफक-फफककर रोने लगे. ये घड़ियाली आंसू एक हत्यारोपी के लिए बहाए जा रहे थे जिसने खुलेआम एक युवक के सीने पर गोली मारी और प्रशासन के सामने से फरार हो गया. हत्यारोपी 25 हजार का इनामी भी है.

लेकिन ये पहली घटना नहीं है जब सत्ता, समाज में जातिवाद का जहर घोला गया हो. एक हत्यारोपी या बलात्कारी के समर्थन में पहले भी भाजपा के नेताओं ने खुलेआम बयान दिए हैं. ताजा उदाहरण हाथरस गैंगरेप कांड का है. हाथरस में एक दलित लड़की के साथ गांव के ही कुछ उच्च जाति के दबंगों ने पहले गैंगरेप किया. लड़की के रीढ़ की हड्डी तोड़ दी. कुछ बोल न सके इसलिए जीभ काट दी. 15 दिन तक दिल्ली के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ती रही और आखिर में ये लड़ाई हार गई.

इसके बाद हाथरस में कुछ दिन के लिए कैमरे पहुंचते हैं. हाथरस कांड राष्ट्रीय मुद्दा बनता है. दलित लड़की पर हुए अत्याचार की बात देश में फैल जाती है. और फिर भाजपा MLA राजवीर सिंह उच्च जाति के 500 लोगों के साथ अपने आवास पर बलात्कार के आरोपियों के समर्थन बैठक करते हैं और मीडिया के सामने कहते हैं-

‘अभी तक सारे चैनल झूठ का प्रचार कर रहे हैं. ऐसी कोई घटना घटी ही नहीं, बलात्कार कोई हुआ नहीं. पहली एफआईआर में केवल एक आरोपी था, फिर चार आरोपी आ गए. गर्दन तोड़ दिया, गैंगरेप किया. ये कर दिया… ये सारी चीजें झूठी हैं. अब सीबीआई इसकी जांच करेगी.’ पीछे से विधायक के समर्थक जिंदाबाद-जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे.’

फिलहाल, योगी सरकार ने इस मामले को पूरी तरह से पलट दिया है. मीडिया के कैमरे भी हाथरस से हट चुके हैं. हत्या, गैंगरेप हुआ था या नहीं ये बाद की बात है. अब सच्चाई ये है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय साजिथ थी, पीएफआई के कथित आतंकियों का हाथ था. नक्सली महिला का भी हाथ था. इसी कहानी के इर्द-गिर्द रोज जांच हो रही है. मीडिया ने भी अपने कैमरे इसी तरफ घुमा लिए हैं.

अब आते हैं जम्मू-कश्मीर के कठुआ कांड पर. बंजारा समुदाय की आठ साल की बच्ची खेत में घोड़े चरा रही थी. उसी दौरान उसे अगवा करके मंदिर में बंधक बनाया गया. उसके साथ गैंगरेप किया गया और बाद में मासूम की हत्या कर दी गई.

इस वारदात के बाद शुरु होती है भाजपा नेताओं की जातिगत राजनीति. वन मंत्री लाल सिंह और उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा ने गैंगरेप के आरोपियों के समर्थन में रैली निकाली और उसे संबोधित भी किया. रैली को संबोधित करते हुए भाजपा नेता चंद्र प्रकाश गंगा ने आरोपियों की गिरफ्तारी को जंगल राज का नाम दिया.

दरअसल, नेताओं की ऐसी रैलियां और ऐसे बयान समाज को तोड़ने का काम करते हैं. वे समाज को ऐसा संदेश देते हैं कि किसी रेपिस्ट या किसी हत्यारोपी के समर्थन में रैलियां, बैठकें या पंचायत होने लगती हैं. पीड़ित अपराधी बन जाते हैं और अपराधी पीड़ित.

हत्या, बच्ची के साथ गैंगरेप. रात के अंधेरे में परिजनों की अनुमति के बगैर अंतिम संस्कार. जैसी बातें झूठी लगने लगती हैं. सच सिर्फ ये हो जाता है कि हमारी जाति के लड़के को फंसाया जा रहा है. हमारी जाति पर छोटी जाति वाले फर्जी हमले कर रहे हैं. लड़ाई वर्चस्व की हो जाती है कि हम तो सदियों से ऊंचे हैं. तुम हमसे कैसे जीत सकते हो.

बलिया, कठुआ, हाथरस जैसी घटनाएं समाजा में लगातार होती रहती हैं. नेता जातिवाद से परहेज की बड़ी-बड़ी बातें चुवावी भाषणों में करते रहते हैं लेकिन समाज तोड़ने का खेल खुलेआम चलता रहता है. यही भाजपा के राम राज्य की सच्चाई है.