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पहले तबलीगी अब प्रवासी मजदूर बना भाजपा का दुश्मन, आखिर योगी बिना दुश्मन क्यों नहीं चला सकते सरकार

 27 May 2020

 

समाज में दो तरह के लोग हैं, एक वो जो अपनी हर सफलता-असफलता के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं. दूसरे वह जो अपनी सफलता के लिए तो खुद को लेकिन असफलता के लिए किसी दूसरे इंसान को दोषी बता देते हैं। देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी कुछ इसी तरह से है। अपनी असफल नीतियों के लिए पार्टी के तमाम नेता किसी भी हद तक चले जाते हैं। पिछले छह सालों के कार्यकाल में ये न जाने कितनी बार अपनी नाकामियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। 

 

मौजूदा समय में दुनिया के तमाम देशों की तरह भारत की भी स्थिति कोरोना वायरस से बेहद खराब है, हर दिन रिकॉर्ड मात्रा में नए केस आ रहे हैं, सरकार पर चौतरफा दबाव पड़ा रहा. स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक गर्त में चली गई है, उसे पटरी पर लाने के बजाय सरकार अभी भी जुमलेबाजी व आरोपों से काम चला रही है. देश में कोरोना संक्रमण बढ़ा तो सरकार ने इसके लिए तबलीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार बता दिया.

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बकायदा बताया जाने लगा कि कुल मरीजों में इतने मरीज तबलीगी जमात से ताल्लुक रखने वाले हैं. फैलते संक्रमण को पूरी तरह से मुसलमानों से जोड़ दिया गया. तमाम ढीले पड़े भाजपा नेताओं को मानों संजीवनी मिल गई हो, वह पूरी मुस्लिम कौम को गरियाने में जुट गए, नफरत का आलम ये रहा कि गली मुहल्ले में सामान बेचकर घर चलाने वाले मुसलमानों को बाहर किया जाने लगा, उनके साथ मारपीट की गई, ये तो भला हो सुप्रीम कोर्ट का जिसने सरकार को कोरोना संक्रमितों के बारे में जानकारी सार्वजनिक न करने का आदेश दिया.

 

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अब नया मामला यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से जुड़ा हुआ है, पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ ने कहा, मुंबई से आने वाला जो भी कामगार है उसमें 75 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनमें कोरोना संक्रमण है. दिल्ली से आने वाले 50 फीसदी में संक्रमण है, वहीं अन्य राज्यों से आने वाले 25-30 फीसदी लोगों में कोरोना का संक्रमण है. उनके इस बयान के बाद अब दो सवाल सामने आकर खड़े हो गए हैं. 

 

पहला ये कि क्या तबलीगी जमात के बाद उनका निशाना प्रवासी मजदूरों की तरफ है? या उनका निशाना उस उपेक्षित वर्ग की तरफ है जो दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के लिए घर से हजार किलोमीटर दूर जाकर हाड़तोड़ मेहनत कर रहा है? दूसरा ये कि योगी सरकार के मंत्रियों ने बताया था कि लॉकडाउन के बाद दूसरे राज्यों से करीब 25 लाख लोग यूपी की सीमा में आ चुके हैं। अगर योगी की बात मानी जाए तब तो कोरोना संक्रमितों की संख्या लाखों में होनी चाहिए, क्या सरकार आंकड़ो के साथ खेल कर रही या फिर जांच के नाम पर बस खानापूर्ति?

 

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अब पहले सवाल पर बात करते हैं. शुरू में ही कहा भाजपा सरकार हमेशा से एक दुश्मन तैयार करके चलती है, इसबार उसका निशाना प्रवासी मजदूर हैं. भाजपाशाषित राज्य उत्तराखंड में भी सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कोरोना के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार बताया था, कहा-उसके पहले राज्य में मरीजों की संख्या न के बराबर थी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार का मजदूरों के प्रति रुख पहले ही देखा जा चुका है जब उन्होंने कहा था कि जो मजदूर जहां है वहीं रहे, प्रदेश की सीमाओं में इंट्री नहीं मिलेगी.

 

यूपी की राजनीति को लंबे समय से समझ रहे अनुदीप जगलान बताते हैं कि सीएम योगी का मुसलमानों व दलितों के प्रति क्या रवैया है उससे हर कोई वाकिफ है, प्रवासी मजदूरों में बड़ी संख्या ऐसे ही वर्ग की है, जिसे अगर निशाने पर लिया भी जाए तो इनके रसूख को आंच नहीं आएगी, इसलिए योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण के फैलने के पीछे प्रवासी मजदूरों को जिम्मेदार बता दिया. अनुदीप आगे कहते हैं कि योगी का इतना कहना ही उनके समर्थकों व नेताओं के लिए अमृत है, अब वह तमाम कहानियां गढ़कर इन्हें बदनाम कर देंगे। 

 

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सीएम योगी के बयान को अगर एकबार मान भी लें तो सवाल उठता है कि क्या यूपी में 10 लाख से ज्यादा कोरोना के संक्रमित हैं? अगर योगी सरकार को ये बात पता है तो जांच में तेजी क्यों नहीं ला रही? अगर योगी के आंकड़ो में इतनी ही सच्चाई है तो फिर टेस्टिंग, संक्रमण के डेटा को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखना चाहिए। लेकिन इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि पूरी सरकार अपनी असफलता के लिए एक दुश्मन खोज रही थी जो उसे प्रवासी मजदूर के रूप में मिल चुका है.