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गुजरात मॉडल: मैं इस देश के लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ हूँ!

 22 May 2020

गुजरात मॉडल - ये वो प्रोडक्ट है, जिसपर PhD होनी चाहिए। गुजरात मॉडल का पैकेट हवा से भरा हुआ था। लेकिन बिका खूब। इतना कि पूरे देश को इस मॉडल के रंग में रंगे जाने की बात होने लगी। और इस मॉडल के पेंटर बाबू यानी कि नरेंद्र मोदी को देश की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

 

गुजरात मॉडल की पोल-खोल


हालाँकि 2014 के बाद से ही गुजरात मॉडल की पोल खुलने लगी। खासतौर पर शुरुआती सालों में आम आदमी पार्टी गुजरात मॉडल के खिलाफ बड़ी ताकत से खड़ी रही। अरविंद केजरीवाल खुद गुजरात गए और वहाँ की सड़कों, सफाई व्यवस्था को लेकर गुजरात मॉडल की आलोचना की।

 

लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ


अब गुजरात मॉडल खुद चीख-चीख कर बता रहा है कि मैं इस देश के लोगों को बेचा गया सबसे बड़ा झूठ हूँ। ज्यादा पीछे नहीं जाते हैं। शुरू करते हैं फरवरी से। कोरोना का वायरस दस्तक दे चुका था। और पीएम मोदी एक नए परसेप्शन को क्रिएट करने के लिए नमस्ते ट्रंप का आयोजन करवा रहे थे। अहमदाबाद क्रिकेट स्टेडियम में भव्य आयोजन होना था। और इस आयोजन से पहले गुजरात मॉडल को ढ़कने के लिए अहमदाबाद में सड़कों पर 4 फुट ऊँची दीवार खड़ी कर दी गई। इस दीवार ने झुग्गियों में रहने वाले गरीबों को ट्रंप की नज़र से तो बचा लिया लेकिन गुजरात मॉडल की हकीकत नहीं बचा पाई।

 

कोरोना में ध्वस्त हुआ गुजरात मॉडल


इसके बाद धीरे-धीरे कोरोना फैलता रहा। और अहमदाबाद कोरोना का बड़ा शिकार बना। कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक बना गुजरात लेकिन अधिक चिंता की बात है यहाँ का मृत्यु दर। देश के कुल कंफर्म्ड केसेज में गुजरात का हिस्सा है लगभग 11 प्रतिशत जबकि कोरोना के कारण हुई कुल मौतों में गुजरात का हिस्सा है लगभग 21.5 फीसदी। मुख्य कारण हो सकती हैं - स्वास्थ्य सुविधाएँ।

 

स्वास्थ्य सुविधाओं में भी गुजरात मॉडल कमज़ोर


अब अगर स्वास्थ्य सुविधाओं को जाँचे तो भी मोदी जी का गुजरात मॉडल नाकाम दिखता है। गुजरात में निजी और सरकारी मिलाकर कुल अस्पताल हैं - 1408, कुल अस्पताल बेड हैं - 64862, कुल ICU बेड हैं - 3243 और कुल वेंटीलेटर्स हैं - 1622. 2020 में गुजरात की अनुमानित जनसंख्या 6 करोड़ 82 लाख है। सरकारी अस्पतालों में गुजरात की हालत राष्ट्रीय औसत से भी खराब है।

 

फेक वेंटीलेटर्स


ख़ैर वेंटीलेटर्स की बात आई तो याद आया विजय रुपाणी जी के राजकोट वाले वेंटीलेटर्स की। रुपाणी साहब ने ज्योति CNC की इन मशीनों को खूब एंडोर्स किया। राज्य में कुल 900 मशीनें इंस्टॉल की गईं।  अकेले अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 230. लेकिन इसके बाद भी अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने और वेंटीलेटर्स मंगवाए क्योंकि रुपाणी साहब के एंडोर्स किए जा रहे वेंटीलेटर्स ठीक नहीं थे।

 

प्रवासी मज़दूरों ने भी किया पर्दाफ़ाश

 

सूरत में प्रवासी मज़दूरों का प्रदर्शन भी गुजरात मॉडल का ही एक चेहरा है। जिस मॉडल को दुनिया भर में प्रचारित किया गया, वह मॉडल महामारी के दौरान अपने मज़दूरों को अपना नहीं सका। मज़दूरों के मामले में अधिकतर राज्यों की हालत ऐशी है लेकिन गुजरात के हालात अधिक निराश करते हैं।

 

सांप्रदायिकता की कसौटी पर गुजरात मॉडल


इस गुजरात मॉडल में सुविधाओं का जितना अभाव है, सांप्रदायिक सोच की उतनी ही अधिकता। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अहमदाबाद सिविल अस्पताल में धार्मिक आधार पर हिंदू-मुसलमानों के अलग-अलग वार्ड बनाए गए। डॉक्टर के अनुसार मेजॉरिटी समुदाय के कुछ लोगों को माइनोरिटी समुदाय के लोगों के साथ रहने में दिक्कत थी जिसके बाद अस्थायी तौर पर ऐसा किया गया। इस बात में ताज्जुब होनी भी नहीं चाहिए। क्योंकि जिस राज्य के मुख्यमंत्री समुदाय विशेष को टारगेट करते हुए बयान देते हैं, वहाँ आम सोच ऐसी बनेगी ही।

 

मैन्युफैक्चर्ड परसेप्शन औऱ गुजरात मॉडल


परसेप्शन राजनीति का सबसे बड़ा हथियार होता है। परसेप्शन आपको एक झटके में CM से PM बना देती है। परसेप्शन स्वाभाविक भी होती है और मैन्यूफैक्चर भी की जा सकती है। स्वाभाविक परसेप्शन था महात्मा गाँधी का। जहाँ जाते थे वहाँ हिंसा रुक जाती थी। विरोधी मत वाले भी बात सुनते थे-मानते थे। मैन्यूफैक्चर्ड परसेप्शन चिप्स के पैकेट में भरे हवा की तरह होता है। झूठा वास्तविकता से कोसों दूर। मोदी जी का गुजरात मॉडल इसी मैन्यूफैक्चर्ड परसेप्शन का एक उदाहरण है।