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शेख हसीना को नहीं भेजा तो…जानें क्या है ढाका का भारत के लिए अगला कदम

 05 Jan 2026

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत को शेख हसीना को वापस लाने की चेतावनी दी है। यूनुस सरकार ने कहा है कि अगर नई दिल्ली से शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार किया जाता है, तो यह दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन होगा। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के विधि सलाहकार आसिफ नजरुल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत यदि हसीना को प्रत्यर्पित नहीं करता है, तो यह साफ तौर पर द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौते का उल्लंघन होगा।


शेख हसीना, जो कि 77 वर्षीय हैं, बीते 5 अगस्त से भारत में हैं। वह छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के कारण 16 वर्षों से सत्ता में रही अपनी अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद ढाका से भारत भाग गई थीं। भारत ने उन्हें शरण दी है, लेकिन उनकी अनुपस्थिति के बाद उनके खिलाफ ढाका में कई केस दर्ज कर दिए गए हैं। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने हसीना और उनकी कैबिनेट के अन्य मंत्रियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

इस बीच, बांग्लादेश ने पहले ही भारत को हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए एक राजनयिक नोट भेज दिया था। अब विधि सलाहकार आसिफ नजरुल ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश हर संभव प्रयास करेगा ताकि हसीना को वापस लाया जा सके। उन्होंने कहा कि अगर भारत शेख हसीना को प्रत्यर्पित नहीं करता है, तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मांगेगा।

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों के तहत, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक अपराध होता है, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को अपराध के लिए चार महीने से ज्यादा जेल या अन्य प्रकार की नजरबंदी की सजा दी गई हो, तो उसे प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है।

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