केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले नए प्रशासन ने तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के नए अवसर खोल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के तेल आपूर्तिकर्ताओं की संख्या पहले ही 27 से बढ़कर 39 हो चुकी है, और यदि अमेरिका से अतिरिक्त तेल आपूर्ति होती है, तो इसका स्वागत किया जाएगा।
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत बनाने की संभावना
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने सियाम के एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा कि अमेरिकी प्रशासन के इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, "अगर आप मुझसे पूछें कि क्या अमेरिकी ऊर्जा बाजार में अधिक मात्रा में आएगी, तो मेरा जवाब हां है। और यदि भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा खरीद के मजबूत अवसर हैं, तो भी मेरा जवाब हां होगा।"
पुरी ने बताया कि बीते तीन वर्षों में भारत ने हर उस स्रोत से तेल खरीदा, जिसने इसे उपलब्ध कराया। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने वहां भूकंपीय सर्वेक्षण और समुद्री तेल उत्पादन में मदद मांगी है। साथ ही अर्जेंटीना की प्रमुख तेल कंपनी वाईपीएफ भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है।
वैश्विक बाजार में तेल की कोई कमी नहीं
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा यह कहा है कि वैश्विक ऊर्जा स्थिति को देखें, तो यह साफ है कि तेल की कोई कमी नहीं है।" पुरी ने बताया कि अमेरिका, ब्राजील, गुयाना, सुरिनाम और कनाडा जैसे देशों से तेल आपूर्ति में वृद्धि हो रही है, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिए गए फैसलों पर बारीकी से नजर रख रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन फैसलों का वास्तविक प्रभाव देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। पुरी ने 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने इस मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसका विश्लेषण अलग से किया जाना चाहिए।
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