Article

कर्ज़ चुकाने के लिए बिक रही है गो फर्स्ट एयरलाइन, NCLT ने दी मंजूरी, ₹11,000 करोड़ का कर्ज बाकी

 12 Jan 2026

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सोमवार को बंद पड़ी बजट एयरलाइन गो फर्स्ट के लिक्विडेशन को मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला न्यायिक सदस्य महेंद्र खंडेलवाल और तकनीकी सदस्य डॉ. संजीव रंजन की पीठ ने सुनाया। यह निर्णय एयरलाइन की लेंडर्स समिति (सीओसी) द्वारा प्रस्तुत आवेदन के पक्ष में दिया गया। लिक्विडेशन की प्रक्रिया के तहत किसी भी कंपनी की संपत्तियों को बेचा जाता है, और इस प्रक्रिया से प्राप्त राशि का उपयोग कर्ज और देनदारियों के भुगतान के लिए किया जाता है। 


इसके बाद, कंपनी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और वह कानूनी रूप से खत्म हो जाती है। गो फर्स्ट, जो वाडिया समूह के स्वामित्व में थी, ने 2 मई 2023 को अपनी परिचालन गतिविधियाँ बंद कर दी थीं। इसके बाद, 10 मई 2023 को कंपनी ने दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की धारा 10 के तहत स्वेच्छा से दिवाला कार्यवाही की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया के तहत कंपनी के संचालन और संपत्तियों की देखरेख के लिए एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) को नियुक्त किया गया था। लेकिन इसके बाद, सीओसी ने गो फर्स्ट के संचालन की स्थिति का गहन आकलन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि एयरलाइन के पास पुनरुद्धार (रिवाइवल) का कोई और रास्ता नहीं बचा है। 

इसके कारण, सीओसी ने सितंबर 2024 में लिक्विडेशन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। गो फर्स्ट पर कुल ₹11,000 करोड़ का कर्ज है, जिसमें बैंकों का ₹6,521 करोड़ बकाया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, जो सबसे बड़ा कर्जदाता है, कंपनी से ₹1,987 करोड़ की वसूली की उम्मीद कर रहा है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ₹1,430 करोड़, ड्यूश बैंक ₹1,320 करोड़ और आईडीबीआई बैंक ₹58 करोड़ के कर्जदाता हैं। इसके अतिरिक्त, एयरलाइन पर विमान लीज पर देने वालों का ₹2,000 करोड़, विक्रेताओं का ₹1,000 करोड़, ट्रैवल एजेंटों का ₹600 करोड़ और ग्राहकों के रिफंड का ₹500 करोड़ का बकाया है। इस सब के साथ, गो फर्स्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार द्वारा शुरू की गई इमरजेंसी लोन स्कीम के तहत ₹1,292 करोड़ का उधार भी लिया था।

 कंपनी की कुछ प्रमुख संपत्तियाँ भी हैं, जिनमें ठाणे में स्थित 94 एकड़ जमीन का एक बड़ा भूखंड शामिल है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग ₹3,000 करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा, कंपनी के पास मुंबई में एक एयरबस ट्रेनिंग फैसिलिटी और मुख्यालय भी हैं, जो इसकी संपत्ति पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन संपत्तियों को बेचकर एयरलाइन के कर्ज और अन्य देनदारियों के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

 यह लिक्विडेशन की प्रक्रिया गो फर्स्ट के लिए एक बड़े वित्तीय संकट का अंत है, लेकिन इससे जुड़े लेंडर्स, विक्रेताओं और ग्राहकों के लिए यह एक कठिन स्थिति है। कंपनी की विफलता और लिक्विडेशन के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि हालांकि गो फर्स्ट एक समय में भारतीय विमानन क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा थी, लेकिन वर्तमान वित्तीय दबाव और संचालन की चुनौतियों ने इसे अस्तित्व के संकट में डाल दिया।

Read This Also:- डोनाल्ड ट्रंप बनें अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति, जेडी वेंस होंगे उपराष्ट्रपति,