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MVA में बढ़ते मतभेद: उद्धव ठाकरे ने शरद पवार से मुलाकात की, स्थानीय चुनावों को लेकर हलचल तेज़

 12 Jan 2026

महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन के अंदर जारी मतभेदों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे ने सोमवार को मुंबई में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। यह मुलाकात शरद पवार के दक्षिण मुंबई स्थित आवास सिल्वर ओक में हुई, जहां उद्धव ठाकरे ने एक घंटे से अधिक समय तक शरद पवार से गहन बातचीत की। इस बैठक में राजनीतिक रणनीति और गठबंधन के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई।


 MVA में बढ़ते मतभेदों को सुलझाने की कोशिश


सूत्रों के अनुसार, शरद पवार ने एमवीए के भीतर गहराते मतभेदों को सुलझाने के लिए अपनी पूरी कोशिशें शुरू कर दी हैं। उन्होंने हाल ही में बयान दिया था कि वह आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर गठबंधन के तीनों घटकों—शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस—के बीच एक बैठक बुलाएंगे। उनका उद्देश्य गठबंधन के भीतर उत्पन्न असहमति को दूर करना था और सभी दलों को एक मंच पर लाकर चुनावी रणनीति पर विचार करना था। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने ही चुनावी निर्णय में चौंकाने वाली घोषणा की, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से यह कहा कि वह आगामी स्थानीय निकाय चुनाव अकेले ही लड़ेगी। यह घोषणा गठबंधन के भीतर एक नए विवाद को जन्म दे रही है, क्योंकि शरद पवार ने पहले ही कहा था कि पार्टी का जनादेश राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट चुनाव लड़ने के लिए था, लेकिन स्थानीय चुनावों में अकेले चुनाव लड़ने का कोई सुझाव नहीं दिया गया था।

 स्थानीय चुनावों में एकजुटता को लेकर स्पष्ट मतभेद


शरद पवार ने इस विषय पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि महा विकास अघाड़ी ने कभी भी स्थानीय स्तर पर चुनावों को मिलकर लड़ने की बात नहीं की थी। उन्होंने कहा, "हमने कभी भी एक साथ स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने का कोई विचार नहीं किया। यह एक पारंपरिक निर्णय है कि प्रत्येक पार्टी अपने-अपने स्तर पर स्थानीय चुनावों में अपनी ताकत आजमाती है।" पवार ने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन का एकजुट होकर चुनाव लड़ने की कोई योजना नहीं है, और यह परंपरा रही है कि सहयोगी पार्टियां स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती हैं। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के इस फैसले ने एमवीए की वैधता और एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इस समय जब पार्टी के भीतर संघर्ष गहराता जा रहा है।

 पिछली विधानसभा चुनावों में गठबंधन को मिली करारी हार


 यह विवाद इसलिए भी और गहरा गया है क्योंकि पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। विधानसभा की 288 सीटों में से गठबंधन को केवल 46 सीटों पर ही जीत मिली थी, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) को 20, कांग्रेस को 16 और शरद पवार की एनसीपी-एसपी को सिर्फ 10 सीटों पर सफलता मिली थी। यह परिणाम गठबंधन की कमजोर स्थिति को उजागर करता है, और इसके बाद से गठबंधन में सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं। हालांकि, चुनावी नतीजों ने गठबंधन के भीतर मतभेदों को और बढ़ा दिया था, जिससे यह सवाल उठने लगे थे कि क्या महा विकास अघाड़ी गठबंधन अपनी छवि को फिर से स्थापित कर पाएगा या नहीं।

शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के बीच बढ़ती खाई


 शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के बीच बढ़ती खाई से महा विकास अघाड़ी के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शरद पवार ने यह भी कहा था कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन के सदस्य एकजुट होकर उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) का निर्णय यह दिखा रहा है कि वह अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। इसका मतलब यह भी है कि दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच और मतभेद हो सकते हैं।

  गठबंधन की साख पर सवाल


इस बीच, कुछ विश्लेषक यह मानते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) का अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय महा विकास अघाड़ी गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह गठबंधन तब से ही सवालों के घेरे में है जब से वह विधानसभा चुनावों में बुरी तरह से हार गया था। अब जबकि स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी हो रही है, गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेद और असहमतियां और भी स्पष्ट हो गई हैं। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मतभेद आगे चलकर गठबंधन की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। 

 आने वाले समय में गठबंधन के लिए नई दिशा की आवश्यकता 


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महा विकास अघाड़ी गठबंधन को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा यदि वह आगामी चुनावों में सफलता हासिल करना चाहता है। इसके लिए शरद पवार और अन्य नेताओं को महा विकास अघाड़ी की स्थिरता को बनाए रखने के लिए एक नई दिशा की आवश्यकता होगी। इस समय गठबंधन के भीतर एकजुटता की कमी दिख रही है, और यह आने वाले समय में महा विकास अघाड़ी के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
 
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