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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव स्थगित, हाईकोर्ट के आदेश के बाद 29 जनवरी के बाद होंगे चुनाव

 12 Jan 2026

चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव अब स्थगित कर दिए गए हैं। हाल ही में, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद, 24 जनवरी को निर्धारित चुनावों के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया और आदेश दिया कि अब ये चुनाव 29 जनवरी के बाद आयोजित किए जाएं। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि नगर निगम चुनाव की तारीखों को लेकर पहले से ही कई राजनीतिक दलों में खींचतान चल रही थी। 


इसके अलावा, हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के प्रशासक को चुनाव आयोजित करने में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके। भा.ज.पा. ने पहले ही अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। मेयर पद के लिए उन्होंने पार्षद हरप्रीत बबला को उम्मीदवार बनाया है, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर बिमला दुबे और डिप्टी मेयर के पद पर लखबीर सिंह बिल्लू को उम्मीदवार घोषित किया गया है। इन सभी ने पहले ही नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ली है और चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने सीनियर डिप्टी मेयर के लिए जसबीर बंटी और डिप्टी मेयर के लिए तरुणा मेहता के नामों का ऐलान किया है और उनका नामांकन भी सफलतापूर्वक भर दिया गया है। आम आदमी पार्टी भी इस चुनाव में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है और जल्दी ही मेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा करेगी। दिल्ली में सांसद मनीष तिवारी की बेटी के रिसेप्शन पार्टी में आप और कांग्रेस के कई प्रमुख पार्षद और नेता एकत्रित हुए। 

इस दौरान दोनों प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं के बीच चंडीगढ़ में होने वाले चुनावों पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस पार्टी के दौरान मेयर पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार पर बातचीत हुई, जो चुनावी रणनीतियों को लेकर दोनों दलों के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव की प्रक्रिया का आयोजन सेक्टर-17 स्थित नगर निगम कार्यालय में सुबह 11 बजे से किया जाएगा। सबसे पहले मेयर पद के लिए वोटिंग होगी, उसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर और फिर डिप्टी मेयर के लिए मतदान होगा। यह प्रक्रिया खासतौर पर महत्वपूर्ण इसलिए हो जाती है क्योंकि इस बार सत्ताधारी आप और कांग्रेस गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या में वोट हैं, लेकिन भाजपा भी इस चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रही है। भाजपा की ओर से उठाए गए इस दावे को लेकर कई राजनीतिक विशेषज्ञों में मतभेद हैं, लेकिन यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प हो गया है। इस चुनाव में पीठासीन अधिकारी के रूप में मनोनीत पार्षद रमणीक सिंह बेदी को चुना गया है, जो इस बार चुनाव के संचालन में कड़ी निगरानी रखेंगे। 

पिछली बार हुए चुनाव में कुछ विवाद सामने आए थे, जब पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने गठबंधन के आठ वोटों को अमान्य कर दिया था, जिसके कारण मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। ऐसे विवादों से बचने के लिए इस बार चुनाव में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं, साथ ही मतदान प्रक्रिया को लेकर सख्त निगरानी रखने के लिए कैमरों का भी प्रबंध किया गया है। गठबंधन में मेयर पद पर आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार होगा, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां जनता मतदान नहीं करती, बल्कि चुने हुए पार्षदों द्वारा मतदान किया जाता है। 

पिछले चुनाव में भी इस प्रक्रिया में कुछ विवाद उत्पन्न हुए थे, जब कुछ वोटों को गलत तरीके से अमान्य कर दिया गया था, जिसे लेकर बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। इस बार ऐसे विवादों से बचने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके। यह चुनाव चंडीगढ़ के राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित करेगा, क्योंकि यहां की नगर निगम सत्ता के लिए भाजपा, आप और कांग्रेस के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा है। इन चुनावों के परिणाम केवल नगर निगम के प्रमुख पदों पर ही असर नहीं डालेंगे, बल्कि चंडीगढ़ के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को भी तय करेंगे।

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