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उत्तराखंड कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) की नियमावली को दी मंजूरी, जल्द लागू होगा नियम

 27 Jan 2026

उत्तराखंड सरकार ने आज समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की नियमावली को मंजूरी दे दी है, जिससे यह जल्द ही राज्य में लागू किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई, और अंततः कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी। मुख्यमंत्री धामी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 2022 में यूसीसी बिल के जरिए उन्होंने जनता से जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि अब सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं और उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा, जहां यूसीसी को लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे राज्य के लिए एक गौरव का पल माना और कहा कि इससे राज्य के नागरिकों को एक समान, पारदर्शी और न्यायपूर्ण कानूनी व्यवस्था मिलेगी।


 21 जनवरी को यूसीसी वेब पोर्टल पर मॉक ड्रिल


यूसीसी का वेब पोर्टल 21 जनवरी को राज्यभर में पहली बार एक साथ उपयोग किया जाएगा, हालांकि यह एक मॉक ड्रिल का हिस्सा होगा। इस अभ्यास के दौरान रजिस्ट्रार, सब रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में यूसीसी पोर्टल पर लॉगिन करेंगे और विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशन, वसीयत आदि सेवाओं के पंजीकरण का अभ्यास करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यूसीसी लागू होने के बाद नागरिकों को इन सेवाओं में कोई तकनीकी परेशानी न हो। मॉक ड्रिल से सरकार, विशेष समिति और अधिकारियों को तैयारियों का मूल्यांकन करने का अवसर मिलेगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाद में वास्तविक प्रक्रिया में कोई दिक्कत न आए। 

 मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को यूसीसी के सभी पहलुओं, जैसे पंजीकरण, तलाक प्रक्रिया, लिव-इन रिलेशनशिप, वसीयत और संपत्ति के अधिकार, आदि पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ड्रिल यूसीसी को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, क्योंकि इससे अधिकारियों और नागरिकों दोनों को नई प्रणाली के लिए मानसिक और तकनीकी तैयारियां पूरी करने का मौका मिलेगा। 
 

यूसीसी लागू होने तक की प्रक्रिया


2022 में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद, मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। इस समिति ने जनता से 20 लाख सुझाव प्राप्त किए और 2.5 लाख लोगों से व्यक्तिगत संवाद किया। इसके आधार पर, समिति ने 2 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री को अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंप दी, और 6 फरवरी को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया। 7 फरवरी को विधेयक विधानसभा से पारित हुआ और इसके बाद इसे राज्यपाल से स्वीकृति प्राप्त करने के बाद राष्ट्रपति को भेजा गया। 11 मार्च को राष्ट्रपति ने यूसीसी विधेयक को अपनी मंजूरी दी। इसके बाद, नियम बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली राज्य सरकार को सौंप दी। अब 20 जनवरी 2025 को कैबिनेट ने नियमावली को मंजूरी दी, और यह कदम राज्य में समान नागरिक संहिता के लागू होने की दिशा में एक और अहम मील का पत्थर साबित हुआ। ### यूसीसी लागू होने पर क्या बदलाव आएंगे?

1. समान कानून: सभी धर्मों और समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक ही कानून लागू होगा। इसका उद्देश्य धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव को समाप्त करना है, जिससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे।
2. पंजीकरण अनिवार्य: 26 मार्च 2010 के बाद से हर दंपत्ति के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही, पंजीकरण नहीं कराने वाले लोग सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रहेंगे। इस पहल का उद्देश्य कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
3. विवाह और तलाक: विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होगी। महिलाएं भी पुरुषों की तरह तलाक का कारण और अधिकार चुन सकती हैं। यह महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समानता का माहौल बनाने का प्रयास है। 
4. धर्म परिवर्तन: बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति को तलाक और गुजारा भत्ता मिलने का अधिकार होगा। इस प्रावधान से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी व्यक्ति को बिना उसकी इच्छा के धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। 
5. कस्टडी और संपत्ति: तलाक के बाद, 5 साल तक के बच्चों की कस्टडी मां को दी जाएगी। संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार मिलेंगे। नाजायज बच्चों को भी जैविक संतान माना जाएगा। इस कदम से लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। 
6. लिव-इन रिलेशन: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले प्रत्येक जोड़े के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। लिव-इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और उन्हें जैविक संतान के समान अधिकार प्राप्त होंगे। यह कदम लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी रूप से मान्यता देने का प्रयास है। 
7. संपत्ति और वसीयत: किसी भी व्यक्ति को अपनी संपत्ति वसीयत के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को देनी का अधिकार होगा। इससे नागरिकों को अपनी संपत्ति के अधिकार पर पूर्ण नियंत्रण मिलेगा और उन्हें अपनी इच्छानुसार संपत्ति को वितरित करने का अधिकार होगा। 
8. पंजीकरण का उल्लंघन: पंजीकरण न कराने पर छह महीने तक की सजा या 25,000 रुपये जुर्माना, या दोनों की सजा का प्रावधान होगा। इस कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया की गंभीरता सुनिश्चित की जा सके।

 निष्कर्ष 

यूसीसी का उद्देश्य राज्य में समानता और न्याय सुनिश्चित करना है, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, या समुदाय से संबंधित हों। इस कानून के लागू होने से उत्तराखंड में सामाजिक और कानूनी संरचना में कई महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। साथ ही, यह कदम राज्य की प्रगति में एक नया आयाम जोड़ने का कार्य करेगा, जो भारतीय समाज में समानता और एकता को बढ़ावा देगा।