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"UCC से जुड़े भ्रम दूर करें और सहमति बनाएं" - उत्तराखंड में लागू होने से पहले पूर्व CJI रंजन गोगोई

 30 Jan 2026

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। जल्द ही राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इसके लागू होने की घोषणा कर सकती है। इस बीच, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने इसे प्रगतिशील कानून बताया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया, लेकिन साथ ही सरकार को सलाह दी कि इसे लागू करने से पहले व्यापक सहमति बनाई जानी चाहिए।


UCC: राष्ट्रीय एकता की दिशा में अहम पहल


सूरत लिटरेचर फेस्टिवल 2025 में “न्यायपालिका के लिए चुनौतियां” विषय पर बोलते हुए, गोगोई ने कहा, “समान नागरिक संहिता एक प्रगतिशील कानून है, जो पुराने और अलग-अलग कानूनों और परंपराओं की जगह लेगा। यह राष्ट्रीय एकता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में मदद करेगा।” उन्होंने कहा कि यूसीसी का भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित) से कोई टकराव नहीं है। गोगोई ने यह भी जोड़ा कि यूसीसी विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों को प्रभावित करेगा। उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह कानून सफलतापूर्वक काम कर रहा है।

आम सहमति की आवश्यकता पर जोर


पूर्व सीजेआई ने सुझाव दिया कि यूसीसी लागू करने से पहले इसे लेकर आम सहमति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “इस कानून को लेकर फैलाई जा रही बेवजह की खबरों और गलतफहमियों को दूर करना जरूरी है। तभी यह देश को एकजुट करने का माध्यम बन सकता है। हमारे पास अलग-अलग रीति-रिवाज और परंपराएं हैं, जो सामाजिक न्याय में बाधा उत्पन्न करती हैं। किसी भी देश में इतने ज्यादा विविध कानून नहीं हो सकते।”

लंबित मामलों पर चिंता


गोगोई ने न्यायपालिका की चुनौतियों पर भी अपनी राय दी। उन्होंने बताया कि भारत में न्यायाधीशों की संख्या 24,000 है, जिसे बढ़ाकर 1,00,000 किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। गोगोई ने बताया कि 2019 में जब वह मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, तब लंबित मामलों की संख्या 3 करोड़ थी।  गोगोई ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से सरकारी कामकाज बाधित होता है। उन्होंने कहा, “हर साल आदर्श आचार संहिता लागू होती है, जिससे प्रशासन पर असर पड़ता है। इसके अलावा, बार-बार चुनाव करवाने में संसाधन और समय की भी बड़ी बर्बादी होती है।”

मुस्लिम संगठनों ने जताई आपत्ति


उत्तराखंड सरकार जहां यूसीसी लागू करने की तैयारी में है, वहीं मुस्लिम संगठन इसके विरोध में अदालत जाने की योजना बना रहे हैं। मुस्लिम सेवा संगठन, तंजीम-ए-रहनुमा-ए-मिल्लत और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी लागू होते ही वे उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख करेंगे। मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने कहा कि यूसीसी के जरिए एक धर्म की संस्कृति को दूसरे धर्म पर थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ है।

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