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विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान पर कसा तंज,कहा- ‘पाकिस्तान एक कैंसर, जो ख़ुद के लिए भी ख़तरा है!’

 02 Feb 2026

मुंबई में आयोजित 19वें नानी ए. पी. पालखीवाला स्मृति व्याख्यान के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर तीखा और स्पष्ट हमला किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों को देश के लिए आत्मघाती बताया। जयशंकर ने पाकिस्तान को एक "कैंसर" के रूप में वर्णित किया, जो न केवल अपने पड़ोसियों के लिए बल्कि खुद अपने समाज और राजनीतिक तंत्र के लिए भी खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियां अब उसके खुद के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करने लगी हैं, और यह स्थिति पाकिस्तान के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो रही है।


 एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के बारे में कहा, "पाकिस्तान हमारे पड़ोस में एक अपवाद बन चुका है, और उसकी आतंकवाद को समर्थन देने वाली नीतियां अब उसके लिए ही घातक बन चुकी हैं। यह सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि समग्र उपमहाद्वीप का भी साझा हित है कि पाकिस्तान अपनी इस नीतियों को छोड़ दे और नए दृष्टिकोण अपनाए।" जयशंकर ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी मानसिकता बदलने की आवश्यकता है, और यह बदलाव न सिर्फ पाकिस्तान के लिए, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी जरूरी है। इसके अलावा, जयशंकर ने भारत की कूटनीतिक दिशा और वैश्विक भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारत को 'विश्वबंधु' यानी सबका मित्र के रूप में प्रस्तुत किया और इसे वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य सिर्फ ज्यादा से ज्यादा दोस्त बनाना नहीं है, बल्कि हर संभव प्रयास के साथ अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन यह सब भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए किया जाएगा। 

 विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने अपने कूटनीतिक संबंधों को क्षेत्रीय और मध्यम शक्ति वाले देशों के साथ मजबूत किया है, जिससे न केवल भारत की कूटनीतिक प्रोफाइल बढ़ी है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति भी अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत की कूटनीति का उद्देश्य देशों के साथ आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों पर आधारित रिश्ते स्थापित करना है।

 जयशंकर ने भारत की कूटनीतिक सफलता को तीन महत्वपूर्ण शब्दों में संक्षेपित किया - 'आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित'। उन्होंने कहा, "पिछले दशक ने हमें यह सिखाया है कि हम विविध रिश्तों को बिना किसी विशेष एकाधिकार के स्थापित और आगे बढ़ा सकते हैं। यह भी दर्शाता है कि कैसे ध्रुवीकृत स्थितियों ने हमारी क्षमता को उजागर किया है, जिससे हम विभाजन को पाटने और अधिक सहयोगी वातावरण बनाने में सक्षम हुए हैं।" विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने वैश्विक कूटनीति के लिए अपने हितों और रणनीतिक उद्देश्यों को स्पष्ट किया है, और इसी दृष्टिकोण से भारत न केवल पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते बनाए रखता है, बल्कि अन्य देशों के साथ भी संतुलित और सहयोगपूर्ण संबंध स्थापित कर रहा है। 

जयशंकर ने अपनी बातों को यह कहते हुए समाप्त किया कि भारत को किसी भी वैश्विक स्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए संतुलन बनाना होगा, ताकि वह अपने साझेदारों के साथ सामूहिक रूप से वैश्विक स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा दे सके।

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