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BJP ने महाकुंभ में सफाई-कर्मियों को बाँटी संविधान की प्रतियाँ, विपक्षी दलों पर साधा निशाना

 03 Feb 2026

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के नेताओं ने गुरुवार को प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला के दौरान एक महत्वपूर्ण कदम उठाया, जब उन्होंने स्वच्छता कर्मियों के बीच भारतीय संविधान की प्रतियां वितरित कीं। भाजपा ने इसे "संविधान गौरव अभियान" के तहत आयोजित किया, जो भारतीय संविधान के 75 वर्षों की उपलब्धि को मनाने के लिए देशभर में चलाया जा रहा है। भाजपा का मानना है कि यह धार्मिक आयोजन, जिसे महाकुंभ के रूप में जाना जाता है, केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एकता और सामाजिक समरसता का महान उत्सव है। 


 महाकुंभ मेला के इस खास मौके पर स्वच्छता कर्मियों को माल्यार्पण कर उन्हें संविधान की प्रतियां सौंपते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा के सचिव अभिजीत मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा, "हम यहां उन लोगों को सम्मानित करने आए हैं जिन्हें पहले अन्य दलों और सरकारों ने महज वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया था। अब हमारे देश में एक ऐसा नेतृत्व उभर कर सामने आ चुका है जो मजबूत और संवेदनशील है, और बदलाव की दिशा में स्पष्ट कदम उठा रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का मानना है कि दलितों और ओबीसी वर्ग को अन्य पार्टियां केवल वोट बैंक समझती हैं, जबकि भाजपा उनका सम्मान करती है और उनके उत्थान के लिए निरंतर काम कर रही है। 

 अभिजीत मिश्रा ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि महाकुंभ का आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि संविधान में निहित एकता और समरसता का प्रतीक है। "यह एकता हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा रखी गई थी, जिसे विरोधी दल नकारने की कोशिश कर रहे हैं। हम संविधान की प्रतियां इसलिए लेकर आए हैं ताकि उस विचार को फिर से पुष्ट किया जा सके।" इस दौरान, भाजपा के इस कदम के बाद विपक्षी दलों के विरोधी बयान भी सामने आए। लोकसभा चुनावों के दौरान विपक्ष ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि उसका "400 पार" नारा संविधान में बदलाव की साजिश का हिस्सा है, लेकिन भाजपा ने इस आरोप का खंडन किया था। हालांकि भाजपा अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और उसे क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन प्राप्त करना पड़ा। दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन ने लोकसभा में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की और अपनी स्थिति को मजबूती से स्थापित किया। भा.ज.पा. के इस कदम के जवाब में समाजवादी पार्टी ने महाकुंभ मेला के अवसर पर अपने संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मूर्ति लगाने का निर्णय लिया है। 

साथ ही, कांग्रेस पार्टी ने 27 जनवरी को 'जय बापू, जय भीम, जय संविधान' रैली आयोजित करने का ऐलान किया है, ताकि वह भाजपा की नीति और गतिविधियों को आलोचना का निशाना बना सके। बीएसपी प्रमुख मायावती भी भाजपा पर बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ कथित अपमान का आरोप लगा रही हैं, और पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपा संविधान और दलित समाज के प्रतीकों का सम्मान नहीं करती। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ से पहले प्रयागराज का दौरा किया था और इस आयोजन को "एकता का महाकुंभ" बताया था, जो देश की सामाजिक और धार्मिक एकता को प्रतीकात्मक रूप से प्रदर्शित करता है।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे "सामाजिक समानता का महापर्व" करार दिया है, जो राज्य की सामाजिक धारा में एक नया सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। राज्य सरकार की प्रचार मुहिम में भगवान राम और निषाद राज की विशालकाय मूर्ति का अनावरण भी शामिल था, जिसे हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा शृंगवेरपुर के निषाद राज पार्क में किया गया था। इस प्रकार, महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का भी केन्द्र बन चुका है, जिसमें विभिन्न दलों के बीच आपसी बयानबाजी और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

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