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79 हजार मामलों की जांच पूरी न होने पर पुलिस पर उठे सवाल, हाई कोर्ट ने DGP से माँगी रिपोर्ट
03 Feb 2026
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। जानकारी के अनुसार, राज्य में 79,000 से अधिक एफआईआर लंबित हैं, जिनकी जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। कोर्ट ने इस मामले में हुई देरी पर गहरी चिंता जताई और नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पंजाब के डीजीपी को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत एक्शन प्लान सौंपना होगा।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस संदीप मौदगिल की एकल पीठ ने कहा कि इस एक्शन प्लान में एफआईआर की तिथि, जांच को पूरा करने के लिए कोर्ट द्वारा निर्धारित समय, और इसे पूरा करने के लिए प्रस्तावित समय सीमा को शामिल किया जाना चाहिए। जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जानकारी डीजीपी के हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत की जानी चाहिए। पूरा मामला फिरोजपुर से जुड़ा हुआ है, जहां हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट पहले ही राज्य सरकार को निर्देश दे चुका है कि वह जांच को एक महीने के अंदर पूरा करे। हालांकि, इसके बावजूद मामले में कोई खास प्रगति नहीं देखी गई। फिरोजपुर एसएसपी सौम्या मिश्रा ने अपनी स्थिति को स्पष्ट किया, लेकिन कोर्ट ने उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया।
एसएसपी सौम्या मिश्रा ने बताया कि जांच में देरी के पीछे तकनीकी संसाधनों की कमी और आरोपी बंसी लाल को गिरफ्तार करने में असफलता जैसी समस्याएं प्रमुख कारण हैं। इसमें एक आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि दूसरे आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पंजाब के वकील एडीएस सुखीजा ने बाद में एक और हलफनामा प्रस्तुत किया। जब हाई कोर्ट ने उस दस्तावेज को पढ़ा, तो यह स्पष्ट हुआ कि मामले में आरोपी को पकड़ने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें आरोपी की लोकेशन ट्रैक करना, उसके मोबाइल फोन की गतिविधियों की निगरानी करना, या हत्या के प्रयास के आरोपी बंसी लाल द्वारा किए गए किसी भी बैंक लेनदेन की जानकारी प्राप्त करना शामिल नहीं था।
इस पर पंजाब पुलिस के डीजीपी को कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि वे उन मामलों के बारे में जानकारी दें, जिनकी निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी नहीं हुई है। जस्टिस ने राज्य की उदासीनता पर गहरी टिप्पणी की और कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस एजेंसियों की जिम्मेदारी है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर देरी न्याय प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। इससे आम जनता का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो सकता है। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया कि वे इस प्रकार के मामलों की जानकारी दें और इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
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