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PM मोदी सुरक्षा मामले में नया मोड़: कमेटी की जांच के बाद FIR में जुड़ी गई गंभीर धाराएं
04 Feb 2026
पांच जनवरी 2022 को पंजाब के फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई गंभीर चूक का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हुसैनीवाला बॉर्डर से 30 किलोमीटर दूर, पीएम का काफिला प्रदर्शनकारियों द्वारा बीच सड़क पर तकरीबन 20 मिनट तक रोका गया था। अब इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 (हत्या के प्रयास) जोड़ दी है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
धारा 307 का मतलब और महत्व
आईपीसी की धारा 307 हत्या के प्रयास से संबंधित है। इस धारा के तहत कोई व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में किसी की जान लेने का प्रयास करता है, तो उसे सजा हो सकती है। इसमें कम से कम 10 साल की सजा, जुर्माना, या आजीवन कारावास का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में मृत्यु दंड भी दिया जा सकता है। पुलिस ने 24 आरोपियों के खिलाफ पहले दर्ज एफआईआर में हल्की धारा 283 (सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करने) को जोड़ा था। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की जांच कमेटी की सिफारिश के बाद इसमें धारा 307 भी जोड़ दी गई। एक आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए फिरोजपुर जिला अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। जमानत याचिका खारिज करने का मुख्य आधार एफआईआर में धारा 307 का जुड़ना था।
घटना का विवरण: बारिश और प्रदर्शनकारियों की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच जनवरी 2022 को फिरोजपुर में पीजीआई सेटेलाइट सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। भारी बारिश के कारण उन्हें सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ी। इस दौरान गांव प्यारे आना के पुल पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनका काफिला रोक दिया। ये प्रदर्शनकारी खुद को किसान बता रहे थे।
प्रदर्शन के कारण पीएम मोदी को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे बिना ही बठिंडा एयरपोर्ट लौटना पड़ा। यह घटना सुरक्षा मानकों के लिहाज से अत्यंत गंभीर थी, क्योंकि काफिला जिस स्थान पर रुका था, वह भारत-पाक सीमा से महज सात किलोमीटर दूर था।
कमेटी की जांच और नई धाराओं का जुड़ना
घटना के बाद, पंजाब पुलिस ने प्राथमिक रूप से धारा 283 के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन उच्च स्तरीय कमेटी की जांच के बाद इसमें धारा 307 जोड़ी गई। इस कदम से स्पष्ट है कि मामले को अब और गंभीरता से लिया जा रहा है। घटना के बाद, पंजाब पुलिस ने प्राथमिक रूप से धारा 283 के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन उच्च स्तरीय कमेटी की जांच के बाद इसमें धारा 307 जोड़ी गई। इस कदम से स्पष्ट है कि मामले को अब और गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी यह घटना केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी बन गई है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की चूक के रूप में पेश कर रहा है।
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