बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ी से चल रही हैं, भले ही चुनाव आयोग ने अब तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की हो, लेकिन सियासी हलचलें जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के विभिन्न जिलों में अपनी "प्रगति यात्रा" के तहत दौरे कर रहे हैं, ताकि जनता से सीधा संवाद कर सकें और विकास के मुद्दों को आगे बढ़ा सकें। इसी दौरान, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अपनी पार्टी की ताकत को बूथ स्तर पर मजबूत करने के लिए "कार्यकर्ता दर्शन और संवाद यात्रा" चला रहे हैं, जिसमें वह कार्यकर्ताओं से मिलकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं और आगामी चुनावों के लिए रणनीतियाँ बना रहे हैं।
इसके साथ ही, एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन भी शुरू हो चुका है, जो बगहा से आरंभ हुआ है, और इसे पश्चिम चंपारण में रखा गया है।
इन राजनीतिक गतिविधियों के बीच, एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी को 20 सीटें देने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वह 20 सीटों पर ही अपनी पार्टी का दावा ठोक रहे हैं, जिन पर उनकी पार्टी की जीत की संभावना अधिक हो। जीतनराम मांझी ने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी 20 सीटें जीतने में सफल रहती है, तो वह एनडीए के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करेंगे और अपने हिसाब से काम करवाएंगे।
इस बीच, मांझी ने पटना के गांधी मैदान में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन करने का भी ऐलान किया है। उनका यह कदम एनडीए के अन्य घटक दलों पर दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है, ताकि सीटों के बंटवारे में उनकी पार्टी को 20 सीटें मिल सकें। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो गया, और इसके बाद से बिहार में राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज़ हो गई हैं। एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2025 के विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, और उनका लक्ष्य है 225 सीटों तक पहुंचना।
इस बार एनडीए के गठबंधन में पांच प्रमुख दल शामिल हैं, जिनमें बीजेपी, जदयू, लोजपा (आर), हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
जीतनराम मांझी की 20 सीटों पर दावेदारी के बाद अब यह देखना होगा कि एनडीए के अन्य घटक दल, जैसे बीजेपी, जदयू, लोजपा (आर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा, इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं। सीटों के बंटवारे पर सहमति बनना, एनडीए की आंतरिक एकजुटता को सुनिश्चित करने के लिए बहुत अहम होगा।
विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों के बीच सीटों का यह संघर्ष सियासी समीकरणों को प्रभावित करेगा और राज्य में आगामी सत्ता के भविष्य को तय करेगा। जीतनराम मांझी का यह दावा और सम्मेलन का आयोजन निश्चित रूप से बिहार की राजनीति में हलचल मचाएगा, और यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिरकार किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हैं और एनडीए के भीतर सीटों का बंटवारा कैसे होता है।