उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भाजपा नेता मनोज पासी के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित पिटाई ने सियासी हलकों में एक बड़ा बवाल मचा दिया है। इस मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा, “प्रयागराज के झूंसी में उत्तर प्रदेश की प्रभुत्ववादी पुलिस ने क्या सिर्फ इसलिए एक व्यक्ति को बुरी तरह पीटा क्योंकि उसका नाम 'मनोज पासी' है? यूपी में पीडीए समाज का व्यक्ति हमेशा ही भाजपा की प्रभुत्ववादी सोच का शिकार होता है, चाहे वह सत्ताधारी दल से जुड़ा हो या नहीं। पीडीए की यही पुकार है—अब अत्याचार सहन नहीं होगा!”
हालांकि, अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में मनोज पासी को भाजपा नेता के रूप में संदर्भित नहीं किया है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।
यह घटना उस वक्त हुई जब मनोज पासी, जो भाजपा के अनुसूचित मोर्चे के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं, अपने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ झूंसी थाने पहुंचे थे। उन्होंने थानेदार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया था और इसे लेकर धरना देने लगे थे। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कमरे में बंद कर बुरी तरह से पीटा। जब इस घटना की जानकारी भाजपा के अन्य कार्यकर्ताओं को मिली, तो वे भी थाने पर पहुंचे और कार्रवाई की मांग करने लगे।
संगठित विरोध के चलते स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। कई भाजपा नेता, जिनमें महापौर गणेश केसरवानी, विधायक दीपक पटेल, एमएलसी निर्मला पासवान, गंगापार जिलाध्यक्ष कविता पटेल और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे, थाने पर पहुंचे और पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उन्हें निलंबित करने और जेल भेजने की मांग की। इन नेताओं ने कहा कि पुलिसकर्मियों की कड़ी सजा दिलवाने तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को तेज करने के लिए अलाव जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ भी शुरू कर दिया।
इस दौरान डीसीपी नगर अभिषेक भारती ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि जब तक आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। इसके बाद, डीसीपी ने मामला गंभीरता से लिया और थाने में मौजूद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। साथ ही, इस पूरे मामले की जांच की जाएगी।
इस घटना के बाद से प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं, और विपक्षी दलों ने इसे उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, वहीं आम जनता और पीडीए वर्ग के लोगों के साथ ज्यादती हो रही है।
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