दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने पांच उम्मीदवारों की एक और सूची जारी की है। इस सूची में अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित बवाना सीट से सुरेंद्र कुमार और करोलबाग सीट से राहुल धानक को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा, रोहिणी से सुमेश गुप्ता, तुगलकाबाद से वीरेंद्र बिधूड़ी और बदरपुर से अर्जुन भड़ाना को टिकट दिया गया है। इस घोषणा के साथ कांग्रेस ने 70 में से 68 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 5 फरवरी को एक ही चरण में होंगे, जबकि मतगणना 8 फरवरी को की जाएगी। आम आदमी पार्टी (आप) ने पहले ही सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अब तक 59 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी है, और 18 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 20 जनवरी तक अपने नाम वापस ले सकते हैं।
आम आदमी पार्टी की जीत का सिलसिला जारी
दिल्ली में आम आदमी पार्टी 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर चुकी है। 2015 के चुनाव में पार्टी ने 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 2020 में उसने 62 सीटें जीतीं। इससे पहले, 2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन यह गठबंधन सरकार महज 49 दिनों तक ही चली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद सरकार गिर गई। इसके बाद आप ने लगातार दो चुनावों में बड़े बहुमत से जीत दर्ज की और अपनी पकड़ मजबूत की।
कांग्रेस की चुनौतियां और इतिहास
दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले दो विधानसभा चुनावों में बेहद खराब रहा। 2015 और 2020 के चुनावों में पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। जबकि 1998 से 2013 तक कांग्रेस ने दिल्ली की राजनीति पर दबदबा बनाए रखा था। शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी ने लगातार तीन बार (1998, 2003 और 2008) जीत हासिल की और सरकार बनाई।
हालांकि, 2013 के चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को समर्थन देकर सरकार बनाने में मदद की। यह सरकार भी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। इसके बाद से कांग्रेस लगातार कमजोर होती चली गई।