गौतम अडानी को भारी नुकसान पहुंचाने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च अब होगी बंद, फाउंडर ने कहा, ‘यह मेरे जीवन का एक अध्याय था’
06 Feb 2026
अमेरिका की शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी सेवाएं बंद करने की घोषणा कर दी है। बुधवार को फर्म के संस्थापक नाथन एंडरसन ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह निर्णय काफी सोच-विचार और चर्चा के बाद लिया गया है। हालांकि, उन्होंने कंपनी बंद करने के पीछे कोई ठोस कारण स्पष्ट नहीं किया। हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्टों के जरिए अडाणी ग्रुप और इकान इंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया था।
एंडरसन की घोषणा का विवरण
नाथन एंडरसन ने फर्म की आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोट साझा करते हुए कहा, “जैसा कि मैंने पिछले साल के अंत से अपने परिवार, दोस्तों और टीम के साथ साझा किया था, मैंने हिंडनबर्ग रिसर्च को बंद करने का निर्णय लिया है। हमारी योजना थी कि जिन प्रमुख मामलों पर हम काम कर रहे थे, उन्हें पूरा करने के बाद कंपनी का संचालन समाप्त कर दिया जाए। हाल ही में हमने जिन पोंजी मामलों को उजागर किया और नियामकों को रिपोर्ट सौंपी, वह हमारे सफर का आखिरी कदम है।"
एंडरसन ने आगे कहा कि उनकी टीम ने कुछ ऐसे "साम्राज्यों" को चुनौती दी, जिन्हें वे कमजोर करना जरूरी समझते थे। उन्होंने हिंडनबर्ग रिसर्च को अपने जीवन का एक अध्याय बताते हुए कहा, “अब मैं इसे अपने जीवन की परिभाषा के बजाय, अतीत का एक हिस्सा मानता हूं।"
आत्मनिरीक्षण और व्यक्तिगत बदलाव
नाथन एंडरसन ने अपने नोट में कहा कि उनका ध्यान हमेशा अपने करियर पर केंद्रित रहा, जिसकी वजह से उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों को पर्याप्त समय नहीं दे पाया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा,
“मैं उन पलों के लिए माफी चाहता हूं, जब मैंने आप सबको नजरअंदाज किया और काम को प्राथमिकता दी। अब मैं आप सभी के साथ अधिक समय बिताने का इंतजार नहीं कर सकता।"
एंडरसन ने अपने पाठकों का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके समर्थन और संदेशों ने उन्हें लगातार प्रेरित किया।
अडाणी-हिंडनबर्ग विवाद का उल्लेख
जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप पर शेयर बाजार में हेरफेर और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए थे। इस रिपोर्ट के बाद अडाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई और समूह के बाजार मूल्य में करीब 140 बिलियन अमेरिकी डॉलर की कमी दर्ज की गई।
यह विवाद इतना बढ़ा कि संसद में बहस का विषय बन गया और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस पर कोर्ट ने एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया और भारतीय बाजार नियामक सेबी (SEBI) को तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
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