शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव ने हाल ही में एक बैठक में पार्टी के आंतरिक कामकाज को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की। रत्नागिरी जिले के चिपलुन में आयोजित इस बैठक में जाधव ने कहा, "यह कहना काफी दुखद है, लेकिन हमारी पार्टी अब कांग्रेस जैसी हो गई है। हम पार्टी में काम न करने वाले नेताओं और पदाधिकारियों को बदलने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं। इसके अलावा, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के सुझावों को सुनने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।"
उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) की आगामी निकाय चुनावों के लिए तैयारियों को देखते हुए यह बयान पार्टी के लिए एक शर्मिंदगी का कारण बन सकता है।
जाधव ने अपनी टिप्पणी में यह भी जोड़ा कि पार्टी के पदाधिकारियों का कार्यकाल तय होना चाहिए, ताकि उनका कार्यकाल निर्धारित किया जा सके और उन्हें एक निश्चित समय के लिए ही पद पर बने रहने का अवसर मिले। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "पार्टी कार्यकर्ता संगठन के लिए काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन नेता तब तक उनकी मेहनत का सम्मान नहीं करेंगे जब तक वे ईमानदारी से काम नहीं करेंगे। इस समय नेताओं को पैसे देने वालों का पक्ष लिया जा रहा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला टूट रहा है।"
जाधव ने यह भी कहा, "शिवसेना एक आग की तरह है, और कभी-कभी हमें उस आग के अंगारों पर चलना पड़ता है। हमें एकजुट रहकर इसे संभालना होगा।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के लिए यह जरूरी है कि उसके पदाधिकारी जवाबदेह रहें और पार्टी के आंतरिक कामकाज को पारदर्शी बनाया जाए।
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के भीतर जाधव की टिप्पणी पर असंतोष व्यक्त किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी उनके बयान पर चर्चा करेगी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण समय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। राउत ने कहा, "हम इस पर भास्कर जाधव से बात करेंगे, लेकिन हमें अपने शब्दों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, खासकर जब पार्टी चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।"
पूर्व सांसद विनायक राउत ने जाधव के बयानों को अधिक तवज्जो देने की बजाय उन्हें एक सामान्य टिप्पणी के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि जाधव द्वारा पार्टी पदाधिकारियों के लिए कार्यकाल की सीमा तय करने का विचार सही है। राउत ने कहा, "यह विचार पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के मन में भी है, और शायद पार्टी के संविधान में इसके लिए प्रावधान किया जा सकता है।"
भास्कर जाधव का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब पार्टी आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई है, और यह पार्टी के भीतर नेतृत्व की भूमिका को लेकर उठते सवालों का संकेत भी देता है। जाधव का मानना है कि यदि पार्टी को एकजुट रहकर अपनी पहचान बनाए रखना है, तो उसे अपने आंतरिक विवादों को सुलझाना होगा और अपने पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना होगा।