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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कानून के खिलाफ गलत दलीलें बर्दाश्त नहीं’, आखिर ED के किस केस में मिली फटकार?

 09 Feb 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से कानून के विपरीत दी गई दलीलों को सख्ती से खारिज कर दिया। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के उस तर्क को भी नकार दिया, जिसमें कहा गया था कि पीएमएलए की धारा 45 किसी महिला पर लागू नहीं होगी। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइंया की पीठ ने स्पष्ट तौर पर कहा, "हम केंद्र सरकार द्वारा कानून के विपरीत दिए गए तर्कों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"


इससे पहले, कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) की जमकर आलोचना की थी, जिन्होंने तर्क दिया था कि कड़ी जमानत शर्तें महिलाओं पर भी लागू होती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 45 के प्रावधान में जमानत के लिए महिलाओं को दो शर्तों से साफ तौर पर छूट दी गई है।

आज मामले की सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी की ओर से दी गई पूर्व दलील के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार यह मिसकम्युनिकेशन की वजह से हुआ था। हालांकि, जस्टिस ओका ने स्पष्ट किया कि यह कोई मिसकम्युनिकेशन नहीं था। उन्होंने कहा, "अगर केंद्र सरकार के पेश होने वाले लोग कानून के बुनियादी प्रावधानों को नहीं जानते, तो उन्हें इस मामले में क्यों पेश होना चाहिए?"

जस्टिस ओका ने कहा, "हम इस तरह की दलीलों की कभी सराहना नहीं करेंगे।" इसके बाद तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपी महिला आपराधिक गतिविधियों की सरगना थी, और केवल महिला होने के आधार पर उसे जमानत नहीं दी जा सकती।

सरकारी स्कूल की टीचर शशि बाला पर शाइन सिटी ग्रुप ऑफ कंपनीज को अपराध की आय को लूटने में मदद करने का आरोप है। ईडी के आरोपों के अनुसार, वह कंपनी के डायरेक्टर रशीद नसीम की विश्वासपात्र थी और उसने धोखाधड़ी वाली योजनाओं के जरिये निवेशकों को ठग कर अवैध लेनदेन में मदद की। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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