महाकुंभ अब सिर्फ भारत का धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक पर्व बन चुका है, जिसमें दुनिया भर से लोग अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ भाग लेने के लिए संगम तट तक पहुंच रहे हैं। पहले जहां यह मेला केवल भारतीय श्रद्धालुओं तक सीमित था, वहीं अब यूरोपीय, अमेरिकी और अफ्रीकी देशों के साथ-साथ पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों के लोग भी इस विशाल आयोजन का हिस्सा बनने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। खासकर पाकिस्तान में महाकुंभ के प्रति एक गहरी रुचि देखी जा रही है, जो गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों से भी स्पष्ट है। पाकिस्तान में महाकुंभ को सबसे अधिक सर्च किया जा रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति विदेशों में भी गहरी दिलचस्पी बढ़ रही है।
पाकिस्तान के अलावा कतर, यूएई, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी महाकुंभ में रुचि दिखाई है। इन देशों के लोग इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं। नेपाल, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे देशों से भी लोग महाकुंभ में सम्मिलित होने के लिए उत्साहित हैं। इसका सीधा संकेत है कि महाकुंभ अब एक वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है, जो विश्वभर में भारतीयता और हिंदू धर्म के महत्व को प्रदर्शित करता है।
महाकुंभ के इस अवसर पर कई नई परंपराओं और धार्मिक आयोजनों को शामिल किया गया है। इस बार विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को भी महाकुंभ में प्रमुख स्थान दिया गया है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्राग ज्योतिषपुर में पूर्वोत्तर के संतों के शिविर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान असम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से आए संतों ने अपने धार्मिक आयोजन किए। सुबह चावल से बने पारंपरिक व्यंजनों का वितरण हुआ, जिससे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का आदान-प्रदान हुआ। महिलाओं ने बिहू नृत्य प्रस्तुत किया, जो असमिया संस्कृति का प्रमुख हिस्सा है, और इसके जरिए उन्होंने महाकुंभ में असम के अद्वितीय सांस्कृतिक रंग को बिखेरा। इस अवसर पर असम के महामंडलेश्वर केशव दास ने बिहू पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।
महाकुंभ के स्नान पर्व पर संगम तट पर उमड़ी विशाल भीड़ में न केवल धार्मिक एकता बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का भी संदेश गूंजता रहा। इस दिन को खास बनाने के लिए कई जत्थों ने एक साथ स्नान किया और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। विशेष रूप से झारखंड से महाकुंभ में स्नान करने पहुंचे मनोज कुमार श्रीवास्तव अपने जत्थे के साथ तिरंगा थामे हुए संगम की ओर बढ़ते हुए राष्ट्रीय एकता का संदेश देते नजर आए। उनके साथ चल रहे सभी श्रद्धालु भी ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाते हुए इस धार्मिक अवसर को और भी खास बना रहे थे।
यह दृश्य सिर्फ धार्मिक एकता का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह भारत के विविधता में एकता की ताकत को भी दर्शाता है। महाकुंभ में आने वाली भीड़ का यह संकलन केवल भारत के विभिन्न हिस्सों से नहीं बल्कि विदेशों से भी हो रहा है, जो इस बात का प्रतीक है कि महाकुंभ अब एक वैश्विक पर्व बन चुका है। इस प्रकार महाकुंभ न केवल भारतीय संस्कृति की महत्ता को प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि यह भारतीयता के प्रति एक गहरी जागरूकता भी उत्पन्न कर रहा है, जो पूरी दुनिया में भारतीय सभ्यता और धर्म के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहा है।
Read This Also:- महाकुंभ की सफाई और सुरक्षा से खुश किसान नेता राकेश टिकैत, अखिलेश को दिया करारा जवाब