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महाभियोग और मार्शल लॉ के बीच, साउथ कोरियाई राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol गिरफ्तार

 13 Feb 2026

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल को भ्रष्टाचार और मार्शल लॉ से जुड़े मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया है। 3 दिसंबर को मार्शल लॉ की घोषणा के बाद से देश में राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले, यून ने एक वीडियो मैसेज के माध्यम से अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "इस देश में कानून का शासन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।"


गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा बलों और समर्थकों में झड़प


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार सुबह 3,000 से अधिक पुलिस अधिकारी और भ्रष्टाचार विरोधी जांचकर्ता यून के आवास के पास तैनात किए गए। इस दौरान, यून के समर्थकों और सत्तारूढ़ पीपुल्स पावर पार्टी के सदस्यों ने सुरक्षाबलों का विरोध किया। दोनों पक्षों में झड़पें हुईं, जिससे कई लोगों को हिरासत में लिया गया। अंततः, इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच, यून को गिरफ्तार कर लिया गया।   यून की गिरफ्तारी के बाद, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी घटनास्थल पर पहुंचे और विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने "इस्तीफा दो," "तुम्हारा समय पूरा हो गया है," और "जिम्मेदारी लो" जैसे नारे लगाए।

महाभियोग और मार्शल लॉ की घोषणा


यून सुक येओल ने 3 दिसंबर को देर रात मार्शल लॉ की घोषणा करते हुए विपक्षी सांसदों पर "राज्य के मामलों को पंगु बनाने" का आरोप लगाया। यून के अनुसार, यह कदम देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक था। हालांकि, नेशनल असेंबली ने छह घंटे के भीतर इस आदेश को पलट दिया। यून के फैसले की जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों से कड़ी आलोचना हुई। संसद ने यून के खिलाफ महाभियोग के लिए मतदान करने के कुछ हफ्ते बाद प्रधानमंत्री और कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू को भी महाभियोग के लिए मंजूरी दी। इसके बाद वित्त मंत्री चोई सांग-मोक को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया।

अदालती जांच और राजनीतिक संकट


यून के खिलाफ संवैधानिक न्यायालय में जांच और महाभियोग की सुनवाई चल रही है। पिछले महीने संसद ने राष्ट्रपति पद की शक्तियां उनसे छीन ली थीं। अब अदालत को यह तय करना है कि यून को औपचारिक रूप से हटाया जाएगा या बहाल किया जाएगा।   यून सुक येओल की गिरफ्तारी और मार्शल लॉ की घोषणा से दक्षिण कोरिया में गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। यून की विद्रोही स्थिति और उनके फैसले देश की राजनीतिक स्थिरता पर बड़ा प्रभाव डाल रहे हैं। संवैधानिक न्यायालय का फैसला यह तय करेगा कि इस संकट का समाधान कैसे होगा।

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