दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर जाट समुदाय के लिए केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल किए जाने की अपनी पुरानी मांग को दोहराया है। उनका कहना है कि अगर दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जाता है, तो उन्हें केंद्र सरकार के आरक्षण के लाभ मिलेंगे, जो नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अवसरों को बढ़ा सकता है। हालांकि, केजरीवाल के इस रुख पर भाजपा ने कड़ी आलोचना की है। भाजपा का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल जाट समुदाय को आरक्षण के मुद्दे पर ‘उकसा’ रहे हैं, और इससे चुनावी माहौल को गर्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
केजरीवाल ने इस मुद्दे को ऐसे समय पर उठाया है जब दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। दिल्ली में चुनावी माहौल लगातार तीव्र हो रहा है, और दोनों प्रमुख दलों, भाजपा और आप, ने इस समुदाय के वोटों को अपनी ओर खींचने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। दिल्ली में जाट समुदाय की संख्या करीब 7 लाख है, और यह समुदाय मुंडका, नजफगढ़, नांगलोई, मटियाला, बिजवासन, महरौली, बवाना, नरेला जैसे कई महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस वजह से, दोनों ही पार्टियां जाट मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं।
दिल्ली के जाट समुदाय को दिल्ली सरकार के तहत ओबीसी सूची में शामिल किया गया है, और उन्हें राज्य सरकार के संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिलता है।
हालांकि, यह समुदाय केंद्र सरकार के ओबीसी सूची में शामिल नहीं है, जिसका मतलब यह है कि उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। इस मुद्दे पर केजरीवाल ने फिर से अपनी मांग को सामने रखा है कि दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें भी केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल सके और उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
यह मामला 2014 के आम चुनावों से पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा उठाया गया था, जब सरकार ने जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का निर्णय लिया था। हालांकि, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया था, और सरकार से यह पूछा था कि उसने उस पैनल की सिफारिशों की अनदेखी क्यों की, जिसने जाटों को ओबीसी सूची में शामिल करने के खिलाफ राय दी थी।
इसके बाद, जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का मुद्दा एक विवाद बन गया, जो अब तक सुर्खियों में बना हुआ है।
सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाट नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से अपने आवास पर मुलाकात की, जिसमें जाट नेताओं ने उनके साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। इससे पहले, 9 जनवरी को केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की अपील की थी। इस पत्र के बाद, जाट नेताओं ने केजरीवाल से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में मैंने उन्हें 2015 में दिल्ली के जाट समुदाय को दिए गए आश्वासन की याद दिलाई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया था कि दिल्ली के जाट समुदाय को दिल्ली की ओबीसी सूची में शामिल किया जाएगा, लेकिन यह मामला अब तक ठंडे बस्ते में है।"
केजरीवाल ने इस मामले को चुनावी संदर्भ में उठाते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है जब केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाना चाहिए और दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि यह कदम उठाया जाता है तो यह जाट समुदाय के लिए सकारात्मक परिणाम ला सकता है, और उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
उधर, भाजपा ने केजरीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे जाट समुदाय को उकसाने का काम कर रहे हैं, और इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल केवल चुनावी फायदे के लिए इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं, जबकि जाट समुदाय के लिए इससे वास्तविक लाभ नहीं होगा।
चुनाव के इस समय में जाट समुदाय का समर्थन हासिल करना दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए अहम है, क्योंकि यह समुदाय दिल्ली में कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक वोटर के रूप में उभरता है। इस कारण, केजरीवाल और भाजपा दोनों ही पार्टियां जाट समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए तरह-तरह की रणनीतियां अपनाने की कोशिश कर रही हैं।
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