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क़रीब सवा साल बाद थम सकता है इजरायल-हमास युद्ध, संघर्ष-विराम को लेकर जाग रही उम्मीद

 26 Feb 2026

इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष में अब अंत की संभावनाएं नजर आने लगी हैं, क्योंकि अमेरिका और अरब देशों के मध्यस्थों ने संघर्ष विराम को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। इसके साथ ही गाजा पट्टी में बंधकों की रिहाई की दिशा में भी रातोंरात महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों की ओर से सोमवार देर रात यह जानकारी दी गई कि संघर्ष विराम पर वार्ता में कुछ गंभीर प्रगति हुई है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ दिन 15 महीने से अधिक समय से जारी इस रक्तपात को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह युद्ध न केवल इजरायल और हमास के बीच बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए अस्थिरता का कारण बन चुका है। 


अधिकारियों ने यह जानकारी नाम न छापने की शर्त पर दी, हालांकि उन्होंने कहा कि अब इस संघर्ष के थमने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इनमें से एक अधिकारी ने यह भी बताया कि हमास से जुड़ा एक अधिकारी भी इस वार्ता में शामिल था और यह कहा कि अभी कुछ महत्वपूर्ण बाधाओं को हल करना बाकी है, जिनका समाधान निकाले बिना कोई ठोस समझौता संभव नहीं होगा। पिछले साल कई मौकों पर अमेरिकी अधिकारियों ने यह दावा किया था कि दोनों पक्ष समझौते के बहुत करीब हैं, लेकिन बातचीत के दौरान कुछ कारणों से ठहराव आ गया था। अब रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने पुष्टि की है कि समझौते के तहत 33 बंधकों की रिहाई के विषय पर गंभीर चर्चा हो रही है, और इस दिशा में सफलता मिलने की पूरी संभावना है। 

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के साथ दोहा में एक अहम बैठक के बाद, हमास प्रतिनिधिमंडल ने बयान जारी करते हुए कहा कि बातचीत अच्छे परिणामों की दिशा में बढ़ रही है। इसके बाद एक सूत्र ने बताया कि रातोंरात इस बातचीत में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की गई और इस दिशा में एक मसौदा समझौता पेश कर दिया गया है। इस सूत्र के अनुसार, इजरायल और हमास के वार्ताकार अब इसे अपने-अपने नेताओं के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेंगे, ताकि इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा सके।

हमास पर नए दबाव की रणनीति


हाल ही में कतर के मध्यस्थों ने हमास पर इस समझौते को जल्दी स्वीकार करने का नया दबाव बनाना शुरू किया है, जिससे बातों को गति मिल सके। इसके साथ ही, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत, स्टीव विटकॉफ, ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया और इजरायलियों पर दबाव डाला कि वे जल्द से जल्द समझौते पर सहमति जताएं। विटकॉफ हाल ही में इस क्षेत्र में रहे हैं और इस वार्ता में शामिल हुए हैं। एक अधिकारी ने जानकारी दी कि मध्यस्थों ने दोनों पक्षों को समझौते का मसौदा सौंप दिया है और अब अगले 24 घंटे इस समझौते की दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को लेकर मिस्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि रातोंरात अच्छी प्रगति हुई है, लेकिन इसमें कुछ और समय लग सकता है। उनका कहना था कि दोनों पक्षों का उद्देश्य यह है कि ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले यानी 20 जनवरी से पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में पहला कदम उठाया जा सके। 

 अमेरिका और खाड़ी देशों का प्रभाव 


अमेरिका और खाड़ी देशों ने संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई को लेकर न केवल इजरायल और हमास पर दबाव डाला है, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में अपना प्रभाव भी बढ़ाया है। इन देशों का यह प्रयास है कि जल्द से जल्द एक स्थायी शांति समझौता हो, जो क्षेत्र के लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को समाप्त कर सके। इस पूरी प्रक्रिया में कतर और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका अहम हो गई है, जिन्होंने विभिन्न चरणों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत को सुचारु रूप से चलाने में मदद की है। इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन का भी इस समझौते पर गहरी नजर है, और वे चाहते हैं कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित होने से पहले ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ लें, ताकि यह उनके प्रशासन की बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखी जा सके।

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