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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा – राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा भारत की सच्ची स्वतंत्रता का प्रतीक
02 Mar 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत ने कई शताब्दियों तक उत्पीड़न का सामना किया और देश की सच्ची स्वतंत्रता उस दिन आई, जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही भारत को पहले ही स्वतंत्रता मिल गई थी, लेकिन उस स्वतंत्रता की स्थापना नहीं हुई थी।
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को “प्रतिष्ठा द्वादशी” के रूप में मनाया जाना चाहिए। मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि राम मंदिर आंदोलन किसी का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि भारत को जागरूक करने के उद्देश्य से चलाया गया था।
इंदौर में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को ‘राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार’ देने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ था, जब हमें राजनीतिक स्वतंत्रता मिल गई थी और संविधान भी प्राप्त हुआ था। हालांकि, उस समय इस स्वतंत्रता को भावना के अनुसार लागू नहीं किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर आंदोलन विवाद पैदा करने के लिए नहीं शुरू किया गया था। यह आंदोलन भारत को आत्म-जागरण के लिए किया गया था। भागवत जी ने बताया कि जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था, उस दौरान कई छात्र मुझसे सवाल करते थे कि रोजी-रोटी की चिंता छोड़कर मंदिर निर्माण पर क्यों जोर दिया जा रहा है। उस समय मैं उन्हें यही समझाता था कि यह आंदोलन भारत के आत्म जागरण के लिए किया जा रहा है।
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