प्रयागराज में महाकुंभ के पहले शाही स्नान से पूर्व समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीर्थयात्रियों को सफल यात्रा की शुभकामनाएं दीं और साथ ही प्रयागराज के नाविकों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। अखिलेश यादव ने यह कहा कि यदि उनकी पार्टी की सरकार बनती है, तो सपा सरकार में नाविकों को फ्री में नावें दी जाएंगी, ठीक वैसे ही जैसे उनकी पिछली सरकार में लैपटॉप बांटे गए थे। इस घोषणा को उस समय किया गया है जब नाविक समाज के लोग प्रयागराज में अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने इस आंदोलन का एक वीडियो भी अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर साझा किया और लिखा, "महाकुंभ में आए सभी तीर्थयात्रियों का हार्दिक स्वागत एवं अनंत शुभकामनाएं।"
अखिलेश ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि नाविकों को मदद की सख्त जरूरत है, क्योंकि वे महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन के लिए सालों भर तैयारी करते हैं। नाविक कई बार उधारी लेकर नावें बनवाते हैं और बैंकों से लोन लेकर नावें खरीदते हैं, ताकि वे तीर्थयात्रियों की सेवा कर सकें। लेकिन इस समय अगर उन्हें कोई मदद नहीं मिलती, तो वे कहां जाएंगे?
अखिलेश ने यह भी कहा कि अधिकांश नाविक निषाद समाज से आते हैं, जो इस काम से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। उनका मानना है कि सरकार को नाविकों को फ्री में नावें देनी चाहिए, ताकि उनकी मेहनत और कड़ी परिश्रम को सम्मान मिल सके। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर वर्तमान भाजपा सरकार यह काम नहीं करती है, तो उनकी पार्टी सत्ता में आने पर नाविकों को मुफ्त नावें प्रदान करेगी, जैसे पहले लैपटॉप दिए गए थे।
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा, "जो दुनिया को किनारे लगाते हैं, भाजपा सरकार ने उन्हें ही किनारे कर दिया है। जिनका जीवन नाव चलाना है, वे भाजपा सरकार से पूछ रहे हैं कि इन हालातों में हमारा ठिकाना कहां है?"
यह बयान उन्होंने नाविकों की कठिनाइयों के संदर्भ में दिया, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए नाव चलाते हैं और जिन्हें वर्तमान में प्रशासनिक नीतियों और सरकार की अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है।
इस घोषणा को अयोध्या के मिल्कीपुर उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां निषाद समाज एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है। यह माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने इस घोषणा के जरिए निषाद समाज को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है, खासकर तब जब हाल ही में अयोध्या में निषाद समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार की घटना के बाद भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्ष ने आवाज उठाई थी। यह रणनीति भी इस पहलू से जुड़ी हो सकती है कि सपा इस उपचुनाव में निषाद समाज का समर्थन हासिल करने के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है।
इसके अलावा, शनिवार को महाकुंभ मेला प्रशासन द्वारा नाविकों को संगम के आसपास के घाटों से हटाने के आदेश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
प्रशासन ने आदेश दिया था कि नाविक यमुना और किला घाटों को खाली करके अपनी नावें बलुआ घाट और गऊ घाट पर लगा दें। इस आदेश के बाद नाविकों ने यमुना नदी में चक्काजाम कर दिया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। प्रशासन ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए यह आदेश वापस लिया, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि नाविकों को उनकी मेहनत और उनके काम को लेकर किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने नाविकों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की और उन्हें आश्वासन दिया कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो नाविकों को मुफ्त नावें दी जाएंगी, ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें और उनका काम और मेहनत सम्मानित हो।
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