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15,000 डॉलर की रिश्वत का आरोप, जांच के घेरे में कार्ति चिदंबरम, CBI ने दर्ज की FIR

 25 Mar 2026

हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और वर्तमान में कांग्रेस सांसद, कार्ति चिदंबरम के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने यह कदम शराब कंपनी डियाजियो और वेंचर कैपिटल फंड सिकोइया कैपिटल से संदिग्ध फंड ट्रांसफर के आरोपों के बाद उठाया है।


मामला क्या है?


  • जांच के दायरे में आए कार्ति चिदंबरम और उनके सहयोगी एस भास्कररमन द्वारा नियंत्रित एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (ASCPL)
  • एफआईपीबी (विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड) की प्रक्रिया का गलत उपयोग करके संदिग्ध तरीके से विदेशी निवेश को मंजूरी देने का आरोप।
  • जांच के अनुसार, डियाजियो स्कॉटलैंड, जो भारत में ड्यूटी फ्री उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध का सामना कर रहा था, ने कार्ति चिदंबरम से संपर्क किया। डियाजियो स्कॉटलैंड को भारत में अपने कारोबार पर इस प्रतिबंध को हटाने के लिए एएससीपीएल के माध्यम से 15,000 डॉलर की रिश्वत देने की कोशिश की गई थी।
  • एफआईपीबी की मंजूरी के लिए सिकोइया कैपिटल द्वारा आवेदन किए जाने पर यह मामला और उलझता गया। जांच से यह भी पता चला है कि सिकोइया कैपिटल और वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कुछ संदिग्ध शेयर लेनदेन किए गए थे। इन लेनदेन के तहत, सिकोइया कैपिटल ने अत्यधिक कीमतों पर एएससीपीएल को शेयर बेचे और इसके बदले में कुल 22.50 करोड़ रुपये (7,500 रुपये प्रति शेयर) का भुगतान किया, जबकि इन शेयरों का वास्तविक खरीद मूल्य 30 लाख रुपये था।

एफआईपीबी मंजूरी का संदर्भ


  • एफआईपीबी की मंजूरी 9.52 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश के लिए दी गई थी, जो सिकोइया कैपिटल द्वारा भारत में निवेश किया गया था।
  • यह भी जांच के दायरे में है कि कैसे एफआईपीबी की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर सिकोइया कैपिटल को एएससीपीएल के जरिए फर्जी तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
इस पूरे मामले की सीबीआई जांच से यह भी संकेत मिलता है कि कैसे फर्जी शेयर बाजार लेनदेन और रिश्वतखोरी के माध्यम से विदेशी निवेश को प्रभावित किया गया और उसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं।

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