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तालिबान ने भारत से वीजा सुविधा की मांग की: छात्रों, मरीजों और व्यापारियों के लिए अनुरोध

 02 Apr 2026

हाल ही में भारत और तालिबान-शासित अफगानिस्तान के बीच पहली उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने वीज़ा और व्यापार को सुगम बनाने पर चर्चा की। तालिबान ने इस दौरान भारत से अफगान व्यापारियों, रोगियों और छात्रों को वीज़ा जारी करने का आग्रह किया। अफगान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हाफिज ज़िया अहमद ने इस मुद्दे को उजागर करते हुए बताया कि कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने यह बात दुबई में विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात के दौरान कही।


वीज़ा जारी करने की मुश्किलें

 
हालांकि, वीज़ा देने का यह मुद्दा बहुत पेचीदा है। भारत सरकार तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं देती है, और सुरक्षा एजेंसियां अफगानिस्तान से वीज़ा चाहने वालों को लेकर खतरे की आशंका जताती हैं। इसके अलावा, भारत सरकार के पास काबुल में कोई कार्यात्मक वीज़ा सेक्शन नहीं है, जो इस प्रक्रिया को और कठिन बनाता है। सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए तालिबान ने आश्वासन दिया है कि भारत की यात्रा करने वालों को कोई खतरा नहीं होगा, और वे वीज़ा प्राप्त करने वालों की जांच सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, भारत सरकार के लिए यह मुद्दा काफी जटिल बना हुआ है, क्योंकि तालिबान के 2021 में अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद से वह इस दिशा में बहुत ही सख्त रही है।

भारत सरकार के कड़े निर्णय


तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद, भारत सरकार ने तुरंत अफ़गानी नागरिकों को पहले जारी किए गए सभी वीज़ा रद्द कर दिए थे। ऐसे कई अफगानी नागरिक जो भारत आना चाहते थे, वे अब घर पर ही फंसे रह गए हैं। भारत सरकार ने अफगानी नागरिकों के लिए एक नई ई-वीज़ा श्रेणी ‘E-Emergency X-Misc’ शुरू की थी, जिससे वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते थे। हालांकि, छात्रों को अभी भी वीज़ा मिलने में मुश्किलें हो रही थीं, जिससे भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे थे।

छात्रों और व्यापारियों को राहत


तालिबान की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के संकट को ध्यान में रखते हुए, अब वे अफगान नागरिकों को चिकित्सा उपचार के लिए भारत आने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। हाफ़िज़ ज़िया अहमद ने बताया कि दुबई में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सहमत हुए। भारत सरकार ने भी शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ मिलकर अफगान छात्रों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम और कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। व्यापारियों को भी अब आसानी से भारत आने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

सूत्रों के अनुसार, तालिबान अपनी वैधता को भारत से मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे समाधान की भी जरूरत है। वहीं, भारत सरकार की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से अफगान लोगों की तत्काल जरूरतों पर केंद्रित रही, लेकिन इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया। इस पहली उच्च स्तरीय बैठक के बाद, भारत-तालिबान संबंधों में आगे किस तरह की प्रगति होती है, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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